
नई दिल्ली। उत्तराखंड हेलीकॉप्टर क्रैश मेें शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट तपन कपूर (27) शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। निगम बोध घाट पर भारी जन सैलाब के बीच सैनिक सम्मान के साथ धार्मिक रीति-रिवाज से दाह संस्कार किया गया। तपन के पिता नरेश कपूर ने उन्हें मुखाग्नि दी। निगम बोध घाट पर तपन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। भावुक माहौल में उन्हें अंतिम विदाई देते हुए सबकी आंखें नम हो गईं।
तपन के पिता नरेश कपूर, माता लता कपूर और बड़ी बहन श्वेता कपूर सहित अन्य रिश्तेदारों उनके शव वाहन के साथ अंतिम दाह संस्कार करने निगम बोध घाट पहुंचे। केंद्रीय कानून एवं संचार मंत्री कपिल सिब्बल और दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री अरविंदर सिंह लवली, एयर वाइस मार्शल एसके पाणि समेत एयरफोर्स के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर पहुुंचे।
इससे पहले तपन कपूर का पार्थिव शरीर हिंडन एयरबेस से एयरफोर्स के वाहन में कटरा खुशहाल राय स्थित निवास में अंतिम दर्शन के लिए शाम 5:10 बजे लाया गया। यहां दस मिनट तक अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने के बाद पार्थिव शरीर उसी वाहन से दाह संस्कार के लिए निगम बोध घाट ले गए। चांदनी चौक स्थित उनके निवास स्थान कटरा खुशहाल राय से लेकर निगम बोध घाट तक हजारों की संख्या में लोग उमड़े। इस दौरान चांदनी चौक का किनारी बाजार भी उनके सम्मान में बंद रखा गया। तपन कपूर का निगम बोध घाट स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय चिर स्मृति स्थल में दाह संस्कार किया गया साथ ही पुष्प चक्र भी अर्पित किए गए।
स्थानीय पूर्व निगम पार्षद सुमन गुप्ता और चांदनी चौक आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष पराग जैन ने बताया कि उनके पार्थिक शरीर को एयरफोर्स के वाहन से लाया गया था। उसी वाहन से निगम बोध घाट भी ले गए।
पिता को गम तो है, लेकिन गर्व भी!
बेटे को शहीद होने का गम तो है, लेकिन गर्व भी है। ऐसे वीर सपूत का हर बार मेरे घर में जन्म हो। इस बात को कहते-कहते शहीद तपन कपूर के पिता नरेश कपूर की आंखें छलक गईं। शहीद के सम्मान में शुक्रवार को चांदनी चौक का किनारी बाजार भी बंद रहा।
शहीद की मां लता कपूर और बड़ी बहन श्वेता ने भी उन्हें देश का सच्चा सपूत करार दिया। कपूर परिवार के नजदीकी सतीश ने बताया कि तपन के साहस को वे सलाम करते हैं। उसने देश के लिए अपने जान को न्योछावर कर दिया। उन्होंने बताया कि तपन जब भी घर आता था तो बड़े अदब के साथ पेश आता था और सबसे दुआ-सलाम करता था। चांदनी चौक के लोग उसके सद्व्यवहार के कायल थे।
उनके शव के साथ आए एयरफोर्स कर्मी भरत ने बताया कि एयरफोर्स में तपन एक तेज तर्रार अधिकारी माने जाते थे। उन्हें इमरजेंसी ड्यूटी पर उत्तराखंड बचाव कार्य के लिए भेजा गया था। भारत के सच्चे सपूत की तरह वे उत्तराखंड में बचाव कार्य में जुटे थे।
