
चंबा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की एक टीम ने क्षेत्रीय अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा की और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट जांची। टीम की अगुवाई कर रहे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के डायरेक्टर आरसी डांडे व टीम सदस्य डा. नुपूर राय ने कहा कि जिला चंबा में संस्थागत प्रसव की दर दूसरे जिलों के मुकाबले कम है। उन्होंने कहा कि जिला में संस्थागत प्रसव की दर 52 प्रतिशत के पास ही पहुंच पाई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं को प्रसव करवाने के लिए कई तरह की सुविधाएं दे रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जिला में संस्थागत प्रसव दर कम है, यह चिंता का विषय है। डा. नुपूर राय ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करवाने पर जच्चा-बच्चा दोनों की जिंदगी सुरक्षित रहती है। साथ ही बच्चों में होने वाली किसी जन्मजात बीमारी के बारे में भी पता चल जाता है। टीम ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
प्रचार में ढील से खफा
डायरेक्टर आरसी डांडे ने क्षेत्रीय अस्पताल में स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों से योजनाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उन्हें योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्गम जिला चंबा में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की कई योजनाओं का भरपूर प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया है और योजनाएं जागरूकता के अभाव में प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई हैं।
बजट की कोई नहीं
मंत्रालय की टीम ने कहा कि मिशन में बजट की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताई गई खामियों को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। सीएमओ डा. राकेश वर्मा ने कहा कि जिले में 2011 की जनगणना के अनुसार लिंगानुपात 959 है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी सुविधाएं देने के लिए विभाग प्रयासरत है। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. वाईडी शर्मा, डा. विनोद शर्मा, डा. देवेंद्र, उमा परमार, दीपक जोशी मौजूद रहे।
पंचायत प्रतिनिधियों का लें सहयोग
केंद्रीय टीम ने कहा कि एनआरएचएम की योजनाओं से लोगों को अवगत करवाना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य महकमे को बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करना होगा। सीएमओ को ब्लॉक स्तर पर योजनाओं की समीक्षा कर जरूरी निर्देश देने होंगे। योजनाओं के बारे में लोगों को बताने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग लें।
