संगोष्ठी में 10 हजार छरमा पौधों की बुकिंग

कुल्लू। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की लाहौल घाटी के किसानों की आर्थिकी में सुधार की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश कृषि विवि पालमपुर केंद्र सरकार की छरमा परियोजना ए वेल्यू चेन ऑफ सीबकथोर्न के तहत तोद, सिस्सू और गोंधला इलाकों में एक लाख छरमा के पौधों को बांटने जा रही है। ये पौधे स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से 15 से 30 अक्तूबर तक आवंटित किए जाएंगे। यह जानकारी छरमा परियोजना के प्रभारी डा. वीरेद्र सिंह ने लाहौल के मयाड़ और तोद घाटी के सिस्सू, गोंधला, गेमूर
और दारचा में आयोजित छरमा संगोष्ठी में दी। इस बेला पर यहां भाग लेने आए 150 के करीब किसानों को छरमा की खेती वैज्ञानिक तरीके से करने की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय के कुकुमसेरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा.एलके शर्मा ने बताया कि ड्रील्बू नामक उन्नत किस्म की छरमा की पौध उनकी नर्सरी में तैयार है। इसे 15 से 30 अक्तूबर तक आवंटित किया जाएगा। परियोजना प्रभारी डा. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि परियोजना की मियाद 31 मार्च 2014 को खत्म होने जा रही है। ऐसे में उन्होंने उपरोक्त वैली के किसानोें को संगोष्ठी में 30 सितंबर तक गड्ढे तैयार करने को कहा गया है। छरमा संगोष्ठी के दौरान किसानों ने करीब 10 हजार पौधों की पहले ही बुकिंग कर दी है। डा. सिंह ने बताया कि छरमा फल की खरीद के लिए मुंबई की एक कंपनी से करार हुआ है।

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