
हमीरपुर। प्रदेश के भावी शिक्षकों के तोते दूसरी बार फिर उड़ गए हैं। प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के टेट में करीब 90 प्रतिशत अभ्यर्थी न्यूनतम अंक की शर्त को ही पार नहीं कर पाए हैं। वर्तमान में टेट (टीजीटी मेडिकल, नॉन मेडिकल) का परिणाम पिछली बार के मुकाबले भी कम रहा है। अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की ओर से आयोजित टेट का परिणाम करीब 20 से 25 प्रतिशत रहा था। वर्तमान में 10 से 15 प्रतिशत के बीच सिमट गया है। इससे प्रशिक्षित बेरोजगारों की स्थिति और प्रशिक्षण व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, स्कूल शिक्षा बोर्ड ने नॉन मेडिकल में सभी छात्रों को पांच ग्रेस मार्क्स भी दिए हैं।
प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के टीजीटी मेडिकल, नॉन मेडिकल टेट में हजारों अभ्यर्थी शिक्षक बनने की पात्रता को हासिल नहीं कर पाए हैं। सभी अभ्यर्थियों के लिए 55 प्रतिशत न्यूनतम अंकों की शर्त को लागू करें तो भी मेडिकल में सिर्फ 11 प्रतिशत तथा नॉन मेडिकल में 14 प्रतिशत के करीब ही उत्तीर्ण हो पाए हैं। मेडिकल संकाय में परीक्षा में 5786 अभ्यर्थी बैठे थे। 5098 का परिणाम घोषित किया गया है, जिसमें पौने पांच सौ के करीब (55 प्रतिशत अंक की शर्त के अनुसार) ही उत्तीर्ण हुए हैं। नॉन मेडिकल में 10788 ने परीक्षा दी थी। बोर्ड ने 9617 का परिणाम घोषित किया है। अभ्यर्थियों में से केवल साढ़े तेरह सौ (55 प्रतिशत अंक की शर्त के अनुसार) ही उत्तीर्ण हैं। वास्तविक नियम के अनुसार प्रतिशतता इससे भी कम हो जाएगी।
क्या है शर्त
समस्त संकायों में टेट उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अंक सीमा निर्धारित की गई है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक रखे गए हैं। 10 से 15 प्रतिशत की संख्या न्यूनतम 55 प्रतिशत उत्तीर्ण अंक मानकर आ रही है। परिणाम की गणना पर प्रतिशत अधिक कम हो सकता है।
पिछली बार यह रहे थे तर्क
पहली बार आयोजित परीक्षा के दौरान भी कुछ यही हाल था। उस दौरान शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा अभ्यर्थियों ने तर्क दिया था कि पहली बार परीक्षा होने के कारण परिणाम सही नहीं रहा। अधिकांश प्रशिक्षित बेरोजगार शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नहीं हैं, तैयारी के लिए समय नहीं मिल पाया। इस बार ऐसा कुछ नहीं था। भावी शिक्षकों को टेट के पैटर्न के संबंध में भी जानकारी थी और परीक्षा की तैयारी के लिए काफी समय था।
