
चंडीगढ़: शहर में चल रहे एक फर्जी मल्टीस्पैशिएलिटी हॉस्पिटल का भंडाफोड़ हुआ है।यह सैक्टर-19 में पिछले 2 सालों से मल्टीस्पैशिएलिटी हॉस्पिटल और अरोड़ा क्लीनिक के नाम से चल रहा है। इसमें कान, दांत, दिल व दिमाग से लेकर यौन रोगों तक उपचार का इलाज का दावा किया जा रहा है। यही नहीं अस्पताल में बाकायदा 6-7 बोर्ड्स पर मल्टीस्पैशिएलिटी हॉस्पिटल, अरोड़ा क्लीनिक, ई.एन.टी विशेषज्ञ, स्पैशल हियरिंग एड के साथ ब्यूटी क्लीनिक का भी उल्लेख किया गया है।
अरोड़ा क्लीनिक के भीतर रिसैप्शन के नाम पर कुछ नहीं है और न ही कहीं पर डॉक्टर्स के पैनल का कोई बोर्ड टंगा है। स्टाफ के नाम पर भी यहां कुछ नहीं है। न पेशैंट को जांचने के लिए स्ट्रेचर, न ही ब्लड प्रैशर की जांच के लिए बी.पी. मीटर और नर्स। जो व्यक्ति यहां बाहर टंगे बोर्ड को देख आ जाता है उससे कंसल्टेशन के नाम पर 250 रुपए फीस के तौर पर वसूले जाते हैं और डॉक्टर के आने का समय पूछने पर डॉक्टर की व्यस्तता का बहाना बना दिया जाता है। चंडीगढ़ की बोगस डॉक्टर टास्क फोर्स की टीम ने इस फर्जी अस्पताल का भंडाफोड़ दिया है।
टीम में नोडल अधिकारी डॉ. मंजू, डॉ. विशेशी और डॉ. राजीव कपिला शामिल थे। जब टीम ने अस्पताल चालक युवराज अरोड़ा से योग्यता से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा तो युवराज ने दस्तावेज न होने की बात कही। फिर टीम ने मल्टीस्पैशिएलिटी हॉस्पिटल चलाने की बात पूछी तो युवराज ने कहा कि वह ऑन कॉल डॉक्टर्स को बुलाता है परंतु युवराज ने किसी भी डॉक्टर का मोबाइल नंबर या उसकी क्वालीफिकेशन की जानकारी नहीं दी। टीम ने युवराज को 10 दिन में ऑन कॉल डॉक्टर्स के दस्तावेज दिखाने को कहा और जानकारी चंडीगढ़ के स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सौंप दी।
बिना टैस्ट और डॉक्टरी परामर्श के बेचे जा रहे हियरिंग एड
जब फर्जी अस्पताल चलाने की जानकारी मिली तो ‘पंजाब केसरी’ टीम ने सैक्टर-19 के मकान नंबर-1010 में हॉस्पिटल चलाने का दावा करने वाले युवराज अरोड़ा से कान में कम सुनाई देने की बात कही और उसका इलाज पूछा तो टीम और युवराज के बीच यह बातचीत हुई
युवराज -आपको कब से कम सुनाई देता है?
संवाददाता-एक साल से।
यु-एक कान से कम सुनता है या दोनों से?
सं-एक ही कान से, आप डॉक्टर हैं?
यु-मेरे हॉस्पिटल में ई.एन.टी. स्पैशिलिस्ट आते हैं अभी वे व्यस्त हैं। कोई बात नहीं मेरे पास अच्छी हियरिंग एड है जो किसी भी टैस्ट के बिना कानों में फिट की जा सकती है।
सं-शाम को आ जाएंगे डॉक्टर? हियरिंग एड किस कंपनी की है।
यु-नहीं आ सकते, एड लोकल कंपनी की है, कीमत 4,500-5,000 रुपए है।
सं-क्या एड कान में लगाने से पहले पता नहीं होना चाहिए कि कान में कौन सा एड लगाना है?
यु-3 तरह के एड होते हैं। पहला जो मेरे पास है। दूसरा कम्प्यूटराइज्ड और तीसरा डिजीटल। पहले वाले एड के लिए कोई टैस्ट की जरूरत नहीं होती। बाकी दो के लिए टैस्ट करवाना पड़ता है। पर वो महंगे भी बहुत हैं, उनकी कीमत 15,000 रुपए से अधिक होती है। आइए आपके कान में एड लगाते हैं।
सं-कान में एड लगने पर दर्द होने लगा है।
यु-कोई बात नहीं दूसरे एड भी हैं वह लगा लो।
सं-यह एड भी ठीक नहीं लग रहा।
यु-लगता है आप ऐसे ही आए हैं आपके कान को कुछ नहीं है।
हो सकता है घातक
सैक्टर-16 जी.एम.एस.एच के ई.एन.टी विशेषज्ञ डॉ. राजेश धीर का कहना है कि जांच के बिना कोई भी हियरिंग एड कानों में लगाना घातक साबित हो सकता है। कम सुनाई देने पर ई.एन.टी. विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए, फिर ऑडिमीटरी टैस्ट करवाएं तब टैस्ट के रिजल्ट अनुसार हियरिंग एड लगाएं। अगर डॉक्टर के लिखे बिना कानों में कुछ भी फिट कर कानों को ठीक करने की बात कह रहा है तो गलत है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
करेंगे कार्यवाही
नोडल अधिकारी डॉ.मंजू का कहना है कि टास्क फोर्स को भी नकली अस्पताल चलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत मिली थी। व्यक्ति ने अपने घर के बाहर कई तरह के बोर्ड लगा रखे थे। जब टीम ने यहां विजिट किया तो हॉस्पिटल चलाने का दावा करने वाले युवराज के पास कोई भी डाक्यूमैंट नहीं था। कहा गया कि वह ऑन कॉल डॉक्टर्स को बुलाते हैं परंतु उनके फोन नंबर तक उनके पास मौजूद नहीं थे। वह अपनी योग्यता के बारे में भी कुछ बता नहीं सका। यहां हियरिंग एड भी बेची जा रही है। टास्क फोर्स ने दस दिन में ऑन कॉल डॉक्टर्स से जुड़े डाक्यूमैंट देने को कहा है। अन्यथा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मामले की जानकारी चंडीगढ़ स्वास्थ्य सेवा निदेशक को दे दी गई है।
चंडीगढ़ कार्यकारी स्वास्थ्य सेवा निर्देशक डॉ.राजीव वढेरा का कहना है कि अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लोगों को इलाज के नाम पर धोखा देने वाला बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के लिए कानून में सख्त नियम बनाए गए हैं
