
नई दिल्ली। कारगिल में शहीद के नाम पर द्वारका इलाके में बने विजय वीर आवास में फ्लैट तो दे दिए गए, लेकिन यहां की सुरक्षा भगवान भरोसे है। लिहाजा बच्चों के साथ रहने वाली विधवाएं खुद को महफूज नहीं मानतीं। ऐसा कहना है कारगिल युद्ध में शहीद मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी की पत्नी भावना द्विवेदी का।
भावना के अनुसार, घर में बच्चों के साथ अकेले रहने पर हमेशा डर लगा रहता है। दो साल पहले जब घर से गाड़ी की चोरी हुई तो आरडब्ल्यूए तक से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस से भी कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। घटना के बाद से मन में डर बैठ गया है। उन्होंने कहा कि अगर वो (मेजर चंद्रभूषण) होते तो इतनी असुरक्षित जगह पर कतई नहीं रहने देते। सरकार ने भले ही शहीदों के परिवारों को फ्लैट्स दे दिए हैं, लेकिन सुरक्षा के बेहतर इंतजाम नहीं हैं।
भावना के मुताबिक, बिहार में राबड़ी सरकार ने उनके गांव से लेकर स्कूल तक का नामकरण शहीद के नाम पर करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव में उन्हें अभी तक राज्य सरकार की ओर से बिजली का कनेक्शन भी नहीं दिया गया है। यही नहीं, पटना में जमीन देने की घोषणा भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से उनकी कोई शिकायत नहीं है। बस चिंता खुद की सुरक्षा को लेकर है। मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी दुश्मनों से लोहा लेते हुए 2 जुलाई 1999 को कारगिल में शहीद हुए थे।
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जब सुमित राय ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए
कारगिल में कैप्टन सुमित राय ने अपने साथियों के साथ रणनीति के तहत दुश्मन पर अचानक धावा बोला था। भीषण जंग छिड़ गई। तोपखाने और मोर्टार आग उगलने लगे। दुश्मन के तोपखाने और मोर्टार की रेंज में आने से कैप्टन सुमित राय शहीद हो गए। इसी तरह से शहीद अजय आहूजा की पत्नी अलका आहूजा को अपने पति पर गर्व है।
