वित्तीय हालत न खराब न अनियंत्रित: सुखबीर

चंडीगढ़: पंजाब की ‘खस्ता’ वित्तीय हालत के लिए राज्य सरकार की विपक्ष द्वारा व मीडिया में लगातार हो रही आलोचना को उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने रद्द कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि प्रदेश की वित्तीय हालत न तो खराब है और न ही काबू से बाहर।

सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुखबीर ने कहा कि वह इस मुद्दे पर मीडिया में लगभग रोज ही छप रही खबरों का स्पष्टीकरण देते-देते तंग आ चुके हैं। उन्होंने इसलिए फैसला किया है कि वह प्रदेश की ताजा वित्तीय हालत पर एक विस्तृत प्रैजैंटेशन तैयार कर चंडीगढ़ में मीडिया के समक्ष जल्द ही पेश करेंगे ताकि उनके सभी सवालों तथा भ्रमों का तथ्यों के आधार पर सही उत्तर दिया जा सके।

गलत नहीं है सरकारी इमारतें गिरवी रखना: सुखबीर बोले कि सरकारी इमारतों को गिरवी रख बैंकों से ऋण लेने में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि यह ऋण प्रदेश की उन्नति के लिए विभिन्न प्रोजैक्टों पर खर्च किया जाएगा। पंजाब सरकार की वित्तीय हालत यदि खराब होती तो बैंक इसे उधार ही न देते। सुखबीर ने कहा कि आज तक पंजाब को कभी किसी लोन पर डिफाल्ट नहीं किया गया है। न कभी अपने कर्मचारियों को मासिक वेतन देने में कोई कमी-पेशी आई है और न ही उनके भत्तों के भुगतान में कोई कटौती की है।

रैवेन्यू कलैक्शन में भारी वृद्धि : उप-मुख्यमंत्री बोले कि सभी मदों के तहत पंजाब की रैवेन्यू कलैक्शन में लगातार वृद्धि हो रही है। कै. अमरेन्द्र की सरकार जब 2007 में सत्ता से बाहर हुई तो 5 साल में उस सरकार ने प्रदेश की एक्साइज में मात्र 70 करोड़ रुपए की वृद्धि की और यह थी 1570 करोड़ रुपए वाॢषक। अब हमने इस आय को इस वर्ष 4000 करोड़ रुपए कर दिया है और अगले वर्ष 5000 करोड़ रुपए का आंकड़ा भी पार कर लिए जाएगी। वैट से आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है और इस वर्ष यह 20,000 करोड़ तो वर्ष 2017 तक यह आय 40,000 करोड़ हो जाएगी।

वित्तीय दबाव वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण: एक प्रश्न पर उन्होंने माना कि पंजाब की स्थिति यदि थोड़ी बहुत दबाव में है तो वह वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के कारण ही है। राज्य सरकार यदि यह सिफारिशें लागू न करती तो प्रति वर्ष 5000 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी लेकिन ऐसा करना संभव नहीं है।

कम्प्यूटरीकरण है रामबाण इलाज: सुखबीर ने कहा कि वह प्रदेश की टैक्स प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए इसका कम्प्यूटरीकरण करने के प्रति वचनबद्ध हैं। टैक्स प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से एक वर्ष के भीतर ही आय में भारी वृद्धि दर्ज की जाने लगेगी। इसके सकारात्मक परिणाम अभी से सामने आने लगे हैं। दोनों कम्पनियों ने अब लगभग 35 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में जमा करवा दिया है। चावल से तेल निकालकर बेचने वाली एक कम्पनी ने भी अब 20 करोड़ से अधिक टैक्स जमा करवा दिया है। लगभग 5 कम्पनियों द्वारा चोरी किया गया 100 करोड़ से भी अधिक का टैक्स एक सप्ताह के भीतर सरकारी खजाने में आने से स्पष्ट है कि कम्प्यूटरीकरण ही इस बीमारी का एकमात्र रामबाण इलाज है।

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