वन अफसरों को 21 हजार जुर्माना

हमीरपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्रदान करने में देरी का दोषी पाए जाने पर मुख्य सूचना आयुक्त ने वन विभाग के अधिकारियों पर 21,250 रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिकारियों, कर्मचारियों को राशि अपनी जेब से सरकारी खजाने में जमा करवानी होगी। आरटीआई कार्यकर्ता की अपील की सुनवाई के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने फैसला सुनाया। अपीलकर्ता को एक हजार रुपये की राशि कंपनसेशन के तौर पर देने के निर्देश दिए हैं। दो डीएफओ, एक रेंज आफिसर तथा एक कर्मचारी को जुर्माना लगाया है।
आरटीआई कार्यकर्ता ओंकार चंदेल ने डीएफओ हमीरपुर से मझोग जंगल में पकड़े गए अवैध बिरोजे की जानकारी मांगी थी। समय सीमा के भीतर चंदेल को सूचना नहीं मिली। तत्पश्चात प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्देशों के बावजूद सूचना नहीं मिल सकी। दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग में दायर की। मुख्य सूचना आयुक्त ने अपील पर सुनवाई करते हुए समस्त तथ्यों को परखा। इसमें डीएफओ हमीरपुर, रेंज आफिसर हमीरपुर 60 दिनों की देरी का दोषी पाते हुए 15000 रुपये जुर्माना लगाया। दोनों को राशि बराबर भाग में जमा करवानी होगी। चंदेल ने एक अन्य मामले में डीएफओ नाहन से पौधरोपण के संबंध में जानकारी मांगी थी। सूचना देने में देरी के साथ ही आधी अधूरी जानकारी दी गई। मुख्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपील की गई। मामले में सुनवाई के दौरान समस्त तथ्यों के आधार पर डीएफओ तथा डीलिंग असिस्टेंट को 25 दिनों की देरी के लिए 6250 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही अपीलकर्ता को कंपनसेशन के तौर पर एक हजार रुपये की राशि देने के आदेश दिए।

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