
कुल्लू। बजौरा के पास सोमवार की सुबह हुई बारिश न्यूल और रोपा के सैकड़ों लोगों पर भारी पड़ी। सुबह करीब 4 बजे बादल फटने के बाद दोनों गांवों में चीखने चिल्लाने की आवाजें गूंज उठी। कई लोग ने घरों से बाहर निकलकर ऊंचे स्थानों पर जाकर जान बचाई तो कई लोग पानी के बीच में ही करीब एक घंटे तक फंसे रहे।
न्यूल के छोटी कंडी के दयाल सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह जब पानी आया तो कम था और वे घर से बाहर निकल गए। इसके बाद एकाएक पानी बढ़ गया और उनके घरों में घुस गया।
दयाल सिंह ने बताया कि उन्होंने पत्नी पिंगला, बेटे राजेंद्र, छोटे भाई ओमचंद, ओमचंद की पत्नी सपना तथा बच्चों मनीषा, राहुल और काजल के साथ घर से कुछ दूरी पर बारिश के बीच शौचालय में खड़े होकर जान बचाई। बादल फटने के बाद आई बाढ़ की आवाज से दोनों गांवों के लोग सहम उठे थे। छोटी कंडी गांव के रिंकू, लालमन, दिलेराम, नाथूराम और सुंदर लाल ने बताया कि सोमवार सुबह उनके घरों के चारों ओर पानी ही पानी था। उन्हें कई घंटे दहशत में जीना पड़ा।
रोपा के यशपाल ने बताया कि बादल फटने के बाद सारा मलबा और पानी उनके घर में घुस गया और उनके परिवार के 16 सदस्यों ने ऊंचे स्थान पर खड़े होकर अपनी जान बचाई। यशपाल ने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी अपंग मां शकुंतला देवी को कंधों पर उठाकर बड़ी मुश्किल से सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर पहुंचाया। रोपा के विनोद कुमार, किशनचंद, रामसिंह, सागरू राम ने बताया कि बादल फटने के बाद सारा गांव सहम उठा था। उनके घरों के चारों ओर भी पानी भरने से उन्हें दहशत में जीना पड़ा। फायर आफिसर मंडी संतराम वर्धन ने बताया कि कुल्लू से सुबह करीब छह बजे फायर बिग्रेड का बचाव दल पहुंचा था।
तो ज्यादा होता तबाही का आंकड़ा
बजौरा (कुल्लू)। ग्रामीणों का कहना है कि बादल फटने के बाद पानी दिन छोटे-छोटे नालों में बंट गया। इस कारण ज्यादा तबाही नहीं हुई। दोनों गांव के लोगों का मानना है कि यदि बादल फटने के बाद पानी और मलबा एक ही नाले से आया होता तो कई घरों को बहा सकता था।
