
मनाली। लग्जरी टैक्स को लेकर हिमाचल प्रदेश होटलियर्ज एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष उमेश अकरे की अध्यक्षता में प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि पिछले एक साल से पूरे प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है, ऐसे में लग्जरी टैक्स बढ़ाना उचित नहीं है। कराधान एवं आबकारी विभाग ने नए फरमान के तहत होटल वालों को पर्यटन विभाग की ओर से स्वीकृत दर पर 10 प्रतिशत लग्जरी टैक्स देने अनिवार्य किया है। जबकि वर्तमान में होटल वाले जिस दर पर कमरा पर्यटकों को देते हैं, उसी पर 10 प्रतिशत टैक्स अदा करते हैं। हिमाचल प्रदेश होटलियर्ज एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश अकरे ने बताया कि पर्यटकों की कमी के कारण फुल रेट पर कमरे पिछले एक साल से नहीं लग पा रहे हैं, जिस कारण पर्यटन विभाग की ओर से स्वीकृत दर पर टैक्स देना संभव नहीं है। मनाली होटल एसोसिएशन के प्रधान अनूप ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में होटल वाले 10 प्रतिशत लग्जरी टैक्स, 7.42 फीसदी सेवा कर और 5 प्रतिशत वैट के अलावा 25 से 30 प्रतिशत एजेंट को कमीशन देते हैं। उत्तराखंड त्रासदी के बाद मनाली में पर्यटकों की संख्या न के बराबर है। हिमाचल के पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में लग्जरी टैक्स नहीं है। इसके अलावा पंजाब में केवल 5 प्रतिशत लग्जरी टैक्स है। पर्यटकों की कमी को देखते हुए जहां प्रदेश सरकार को टैक्स में छूट देनी चाहिए। उन्होंने सीएम से होटलियर्ज की दिक्कतों को शीघ्र दूर करने का भी आग्रह किया। सीएम ने होटलियर्ज की समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया। उधर, अनूप ठाकुर ने समस्याएं सुनने और होटलियर्ज की दिक्कतों को दूर करने के आश्वासन पर प्रदेश के सीएम का आभार जताया। प्रतिनिधिमंडल में मनाली होटलियर्ज एसोसिएशन के संरक्षक बीएस कपूर, उपाध्यक्ष नील चंद ठाकुर, सह सचिव सुशील, कोषाध्यक्ष गगन ठाकुर सदस्य अमर नाथ व बुद्धि प्रकाश शामिल रहे।
