
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। सामरिक महत्त्व रखने वाले मनाली-लेह मार्ग को बहाल करने में बीआरओ (मौसम सीमा सड़क संगठन) की मुहिम में मौसम बार-बार खलल डाल रहा है। बावजूद इसके कामगारों और जवानों के हौसले बुलंद हैं। बीआरओ के जवान बर्फ का सीना चीरकर मनाली की ओर से रोहतांग टॉप पर पहुंच चुके हैं।
मंगलवार सुबह नौ बजे से ही रोहतांग दर्रे पर बर्फबारी का क्रम जारी रहा लेकिन बीआरओ के जवानों का अभियान इस दौरान भी चलता रहा। बीआरओ का लक्ष्य रोहतांग दर्रे को गत वर्ष के मुकाबले इस बार पहले खोलना है। गत वर्ष रोहतांग दर्रा 24 अप्रैल को यातायात के लिए बहाल हुआ था। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि उनका प्रयास है कि इस बार रोहतांग दर्रा रिकॉर्ड समय में बहाल हो जाए। लेकिन मौसम साथ नहीं दे रहा है। वे लक्ष्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं।
लाहौल की ओर से सीमा सड़क संगठन के जवान ढोहरनी मोड़ के पास बर्फ से जंग लड़ रहे हैं। इस ओर अधिक बर्फ होने से जवानों को खूब पसीना बहाना पड़ रहा है। हिमाचल दिवस के मौके पर कुल्लू में मुख्यमंत्री के हाथों बीआरओ को सम्मानित करने के बाद अधिकारियों और जवानों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
लाहौल घाटी के बाशिंदों ने भी सीमा सड़क संगठन को सम्मानित किए जाने और उत्कृष्ट कार्यों पर बधाई दी है। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संगठन के जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरत राम ने कहा कि इस बार सीमा सड़क संगठन ने घाटी के भीतरी मुख्य मार्गों को पूरी सर्दी बहाल कर नया इतिहास रचा है। मौसम ने साथ दिया तो रोहतांग दर्रा रिकार्ड समय में बहाल कर बीआरओ के साथ एक नई उपलब्धि जुड़ जाएगी। 70 आसीसी के कमांडिंग आफिसर एसके ऐन्थोनी ने बताया कि मनाली की ओर से जवान रोहतांग टॉप छू चुके हैं। लाहौल की ओर से ढोहरनी मोड़ के पास बर्फ काटते हुए आगे निकल रहे हैं।
