
रेवाड़ी। कोसली क्षेत्र के गांव सुरहेली में ग्रामीणों द्वारा मंगलवार रात को पशु तस्करी के आरोप में पांच लोगों को बंधक बना लिया। मौके पर पुलिस पहुंची तो ग्रामीण पशु तस्करों को थाने ले जाने की बजाय वहीं पर पूछताछ करने पर अड़ गए। इससे पुलिस और ग्रामीणों में तनाव की स्थिति बन गई। भारी पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। हाल ही कि मांस और पशु तस्करी की घटनाओं से ग्रामीण इतने रोषजदा था कि उन्होंने थाना प्रभारी को जमीन पर बैठने को मजबूर कर दिया। वहीं, डीएसपी को भी वहीं बैठने की मांग करने लगे। पुलिस द्वारा तस्करी के आरोपियों को गुपचुप थाने ले जाने से ग्रामीण और भड़क गए और उन्होंने उनके कैंटर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। ग्रामीणों के रोष को बढ़ता देख रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ से अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाकर बुधवार सुबह चार बजे स्थिति पर काबू पाया गया।
मंगलवार को गांव सुरहेली की बणी (जंगल) में रात को करीब नौ बजे कुछ लोग पशुओं को एक ट्रक में लाद रहे थे, इसकी सूचना किसी ग्रामीण ने गांव में दी तो सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पशुओं को ट्रक में डाल रहे लोगों को बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने तस्करों की गाड़ी को पहचानते हुए कहा कि पिछले दिनों गांव से कीमती झोटा, एक भैंस और गांव लूला अहीर से गायब हुई भैंस में इसी गाड़ी का प्रयोग किया गया था।
कई जिलों से बुलानी पड़ी पुलिस
पुलिस पटौदी और धारूहेड़ा मामले को ध्यान में रखते हुए पांचों आरोपियों को चुपचाप थाने ले गई तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने वहां मौजूद कोसली थाना प्रभारी को वहीं रहने की नसीहत देते हुए जमीन पर बैठा दिया। मामले की सूचना पाकर मौके पर पहुंची कोसली की डीएसपी धनपती देवी को भी ग्रामीणों ने वहीं बैठा लिया। रात दो बजे तक भी ग्रामीण नहीं माने तो रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ से भारी पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस देखते ही ग्रामीण भड़क गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और तस्करों की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने क्रेन की सहायता से क्षतिग्रस्त गाड़ी को थाने पहुंचाया। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करके और ग्रामीणों को समझाकर करीब तड़के चार बजे मामला शांत कराया।
इन्हें किया गिरफ्तार
पशु तस्करी और चोरी के आरोप में पुलिस ने उत्तरप्रदेश के बागपत निवासी हविउररहमान, आसीम, वसीम, इशराद और उसमान को गिरफ्तार कर लिया है।
पिछले सप्ताह हुए अग्निकांड से चौकस रही पुलिस
धारूहेड़ा में 30 अगस्त को मांस से भरा ट्रक मिलने के बाद भड़की हिंसा में 76 वाहनों को आग लगा दी गई थी। वहीं, गुड़गांव में भी गोतस्करी के शक में एक दर्जन ट्रकों को फूंक दिया गया था। इन घटनाओं से सबक लेते हुए पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया।
