रेत-बजरी के दाम घटाने की तैयारी

शिमला। हिमाचल में खनन को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से बड़ी राहत मिलने के बाद राज्य सरकार अब रेत-बजरी और पत्थर के दामों को नियंत्रित करने की दिशा में बढ़ी है। उद्योग विभाग ने खनन विंग को नई खनन नीति के तहत जल्द परमिट जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है, ताकि मांग के अनुसार आपूर्ति होने के बाद रेट कम हो।
राज्य में खनिजों का खनन 2012 से ही प्रभावित रहा है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रभाव आकलन करवाने की शर्त लगा दी। फिर हिमाचल हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि 31 अगस्त 2013 के बाद हिमाचल में खनन पर रोक रहेगी। राज्य सरकार इसके खिलाफ जब सुप्रीम कोर्ट गई तो इसी बीच केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नदी किनारों से रेत के खनन पर पूरे देश में रोक लगा दी। इससे भवन निर्माण सामग्री की बेहद कमी हो गई। इससे न केवल अवैध खनन एवं तस्करी बढ़ी, बल्कि रेट भी दोगुने से ज्यादा हो गए। अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने खनन के लिए जमीन की कैटेगिरी में बदलाव कर 25 हेक्टेयर तक के केस मंजूर करने की शक्ति राज्य सरकार को दी है। 5 हेक्टेयर तक तो अब पर्यावरण मंजूरी चाहिए ही नहीं।
इसके बाद राज्य में 2013 की खनन नीति उद्योग विभाग ने लागू कर दी है। इसके तहत अब खनन के लिए परमिट दिए जाएंगे। इन परमिट के जरिये निजी भूमि से भी खनन हो सकेगा और लोग अपने घर बनाने के लिए भी ये परमिट ले सकेंगे। पंचायतों को भी खनन के मामलों में एनओसी पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। अन्यथा उनकी सहमति समझी जाएगी। स्टोन क्रशर और नदी-नालों के खनन के लिए अलग-अलग फार्म जारी होंगे। क्रशर के लिए सप्लीमेंटरी फार्म होगा तो अन्य खनन के लिए एम-फार्म। परमिट की तरह ही ये फार्म भी उद्योग विभाग उपलब्ध करवाएगा।

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