
सोलन। सत्र एवं विशेष न्यायाधीश एससी कैंथला की अदालत में रिश्वतखोरी के आरोपी योगेश कुमार बाली को दोषी करार देते हुए दो साल कठोर कारावास और तीस हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की तरफ से मामले की पैरवी उप न्यायवादी एसडी वासुदेव ने की है।
उन्होंने बताया कि दोषी असिस्टेंट कलेक्टर परवाणू के कार्यालय में सीनियर असिस्टेंट के पद पर था। वह आरएल ब्रांच में तैनात था। विजिलेंस ने दोषी को रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथों पकड़ा था। अमर नाथ ने विजिलेंस में शिकायत की थी कि गाड़ी की एनओसी जारी करने के एवज में दोषी तीन हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। उसने कहा कि उसके पिता गोपी चंद मेहता टिप्पर वाहन के मालिक हैं। टिप्पर को उन्होंने पटियाना के दयाल चंद को बेचना था। 05 लाख 50 हजार में यह टिप्पर बेचने पर सहमति बनी। जिसमें साढ़े चार लाख रुपये दे दिए और शेष राशि एनओसी मुहैया होने के बाद देने पर सहमति बनी। एनओसी के लिए तमाम दस्तावेज मुहैया करवाए, लेकिन सीनियर असिस्टेंट इस कार्य के लिए तीन हजार रुपये की मांग करने लगा।
04-5-2011 को योगेश बाली को पकड़ने के लिए विजिलेंस ने जाल बुना और उसे रंगे हाथों धर दबोचा। डीएसपी विजिलेंस रमेश शर्मा ने बताया कि जांच का जिम्मा इंस्पेक्टर हरी राम को सौंपा गया। ट्रायल के दौरान 14 गवाह पेश हुए। बुधवार को पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद माननीय अदालत ने फैसला सुनाया।
