राजधानी ने लिंगानुपात में तोड़ा 110 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली। राजधानी में 110 साल बाद लिंगानुपात (प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) 862 से ऊपर गया है। जनगणना 2011 के आंकड़ों में लिंगानुपात 868 रहा है, जो कि 2001 में 821 था। प्रजनन दर घटने के बावजूद बच्चों में लिंगानुपात प्रति हजार तीन की बढ़ोतरी हुई है। इससे भविष्य में लिंगानुपात सुधरने के अच्छे संकेत मान सकते हैं।
दिल्ली की जनगणना निदेशक वर्षा जोशी ने मंगलवार को जनगणना 2011 के फाइनल आंकड़े जारी किए। इसमें शहर में अनुसूचित जाति की आबादी और कामकाजी आबादी के आंकड़े प्रमुख रूप से नए ट्रेंड में शामिल थे। कुल आबादी में 16.75 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी है।
आंकड़े बताते हैं कि 1901 में लिंगानुपात 862 था, जो 2011 में 868 हो गया है। पुरुषों की आबादी में वृद्धि दर दस साल में 18.1 फीसदी रही है, जबकि महिला आबादी 24.9 फीसदी की दर से बढ़ी है। दिल्ली की कुल आबादी में महिलाओं की भागीदारी 46.47 फीसदी रही है।
जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी की 97.5 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है, जो देशभर में सबसे अधिक है। प्रति किलोमीटर औसतन 11,320 लोग रहते हैं और उत्तर पूर्वी जिला में आबादी घनत्व सबसे अधिक 36,155 व्यक्ति प्रति किमी है। दिल्ली की आबादी में 0-6 साल के बच्चों की भागीदारी 12 फीसदी है, जबकि 14 फीसदी के साथ सीलमपुर सब-डिवीजन सबसे अच्छा प्रजनन वाला रहा है।

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