यमुना जल प्रदूषित करने में आरोप तय

नई दिल्ली। यमुना नदी में गंदा पानी डालने की शिकायत के 13 साल बाद अदालत ने एक रंगाई कारोबारी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कारोबारी पर आरोप था कि वह अपनी रंगाई यूनिट से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे यमुना में डालता था जबकि ऐसा करने की मनाही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने उसके खिलाफ वर्ष 2000 में मामला दर्ज किया था। तीस हजारी स्थित सीएमएम देवेंद्र कुमार शर्मा ने पुरानी दिल्ली स्थित सियाराम डाइंग के मालिक श्याम सुंदर सैनी के खिलाफ आरोप तय करते हुए कहा कि, आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों व वाटर एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर नाले में गंदा पानी छोड़ा जबकि उसके पास रंगाई यूनिट चलाने का लाइसेंस भी नहीं था। मामले की सुनवाई के दौरान समिति के अधिवक्ता एमएस गॉबा ने अदालत में कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने कारखानों का असंशोधित जल सीधा यमुना में छोड़े जाने पर पाबंदी लगाई थी। इसके मद्देनजर दिल्ली सरकार ने 18 फरवरी 2000 को सतर्कता दस्ता बनाया था। सतर्कता दस्ते ने सियाराम डाइंग में छापेमारी के दौरान पाया कि, रंगाई यूनिट में जल संशोधक प्लांट (ईटीपी) नहीं है और वहां से गंदा पानी सीधे नाले में छोड़ा जा रहा था। यूनिट चलाने के लिए समिति की अनुमति भी नहीं थी।

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