
चंडीगढ़: नगर निगम सदन की वीरवार को हुई बैठक में मेयर सुभाष चावला बिना सदन की बैठक स्थगित किए अपने पद से इस्तीफा देने की धमकी देते हुए बाहर निकल गए लेकिन कुछ समय बाद वह लौट आए। यह स्थिति उस समय पैदा हुई जब भाजपा पार्षद अरुण सूद ने मेयर को एक पत्र थमाया। बिना हस्ताक्षरों वाले इस पत्र में किसी अज्ञात इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि मेयर का मुंह बंद रखने के लिए उन्हें लाखों रुपए देने पड़ते हैं।
हालांकि भाजपा पार्षद इस पत्र की जांच कराने की मांग कर रहे थे पर मेयर ने इसे अपने पर सीधा हमला माना व निर्दोष साबित होने तक पद से त्यागपत्र तक देने की धमकी दे डाली। ऐसा मेयर ने दो बार किया। दूसरी बार निगमायुक्त ने सदन की बैठक चाय के लिए स्थगित करने का ऐलान किया।
मेयर जब पहली बार वाक आऊट कर गए तो भाजपा पार्षद डिप्टी मेयर सतीश कैंथ से अनुरोध करते रहे कि वह मेयर की कुर्सी पर बैठें पर वह भी स्थिति को संभालने की बजाए चुपचाप सदन से बाहर चले गए। सदन में वापिस आने के बाद मेयर ने सदन में अपनी बात कहनी शुरू की तो बिना नाम लिए जब उन्होंने कांग्रेस पार्षदों पर ही वार करने शुरू किए तो कांग्रेस पार्षद सतप्रकाश को यह नहीं भाया व उठ कर बोले कि मेरा नाम ही ले दो। जिस पर भाजपा पार्षदों ने उन्हें यह कह कर चुप करा दिया कि पहले मेयर का दुख सुन लो।
मेयर ने भी अपना दुखड़ा सुनाने के बहाने भाजपा व कांग्रेस के पार्षदों पर तीखे प्रहार किए। काग्रेस पार्षदों द्वारा उनके वार्डों में किए जा रहे हस्तक्षेप पर भी मेयर ने सफाई देते हुए कहा कि न तो उनका ऐसा कोई इरादा है व न ही वह यह कभी चाहेंगे। दोपहर बाद उन्हें यह आशा भी नहीं थी कि इन प्रहारों का जवाब उन्हें कांग्रेस के ही पार्षदों से मिलेगा। कुछ समय पहले भाजपा पार्षदों के कांग्रेस की गुटबाजी के बयानों का विरोध करने वाले सतप्रकाश स्वयं ही कांग्रेस की गुटबाजी का खुलासा कर गए।
उनका कहना था कि मेयर कांग्रेस के पार्षदों को अहमियत नहीं देते। उन्होंने कहा कि वह सभी कांग्रेस पार्षदों को साथ लेकर पंचकूला की मेयर से मिलने जाते तो बेहतर होता पर वह अपने कुछ चहेतों को साथ लेकर गए।
मेयर ने सब आरोपों को गलत बताया
मेयर ने इस संबंध में कहा है कि अब तक उन पर जो भी आरोप लगे हैं, वे सब गलत हैं। उन्होंने कहा कि वह निगम में दूसरी बार मेयर बने हैं, जब पहली बार मेयर बने थे तो उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने अपने वार्ड में विकास के लिए ज्यादा पैसे खर्च किए। इसलिए इस बार मेयर बनने के बाद उन्होंने फैसला किया था कि वह अपने वार्ड में फालतू पैसे नहीं खर्च करेंगे। उन्होंने कहा कि एक पार्षद खुद उनके पास कुछ लोगों के साथ मिठाई लेकर एक कार्यक्रम का निमंत्रण देने आए लेकिन बाद में उसी पार्षद ने कार्यक्रम में भाग लेने से उन्हें मना कर दिया, जिसके चलते कार्यक्रम में भाग न लेने के चलते उन्हें अन्य लोगों की आलोचना झेलनी पड़ी।
इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि सैक्टर-19 में परिवार के साथ वह जा रहे थे, जहां लोगों के कहने पर उन्होंने कुछ समस्याएं वहां हल करवा दी लेकिन उन पर इसमें भी वार्ड में द खलअंदाजी करने के आरोप लगे। उन्होंने कहा कि इस सब में उनकी कोई गलती नहीं है, अब तक उन पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे सब गलत हैं।
बैठक से जन्नत ने किया वॉक आऊट
बसपा पार्षद जन्नत जहान उल हक ने कहा कि गत दिन उनके वार्ड में हल्लोमाजरा में पड़ते दीप कंप्लैक्श में वाटर टैंकर के साथ सप्लाई किए जाने वाले पानी में गिलहरी निकली। उन्होंने कहा कि उनके इलाके में पानी की पाइप लाइन बिछाने के प्रस्ताव को पास किए हुए काफी समय हो गया है लेकिन अभी तक वहां पर कुछ काम नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि मेयर ने भी इस मुद्दे को सलाहकार के समक्ष नहीं उठाया, जिसके चलते उनके वार्ड में यह प्रस्ताव पैंडिंग पड़ा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि बैठक में जो भी गंभीर मुद्दे हैं, उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है और सिर्फ नौटंकी की जाती है, इसलिए वह ऐसी बैठक का हिस्सा नहीं बनना चाहती, यह करते हुए उन्होंने बैठक से वॉक आऊट कर दिया।
सामुदायिक केंद्र में राजनीतिक कार्यक्रम करवाने के मामले में निगम ने जांच के आदेश दे दिए हैं। भाजपा पार्षद हीरा नेगी ने आरोप लगाया कि सैक्टर-29 के सामुदायिक केंद्र में कांग्रेस पार्टी द्वारा राजनीतिक कार्यक्रम करवाया गया,जबकि सामुदायिक केंद्र में राजनीतिक कार्यक्रम पर मनाही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में डिप्टी मेयर सतीश कैंथ भी मौजूद थे, इसलिए भाजपा पार्षदों ने डिप्टी मेयर सतीश कैंथ से इस्तीफे की मांग की।
मेयर ने इस संबंध में कहा कि इसमें डिप्टी मेयर की कोई गलती नहीं थी, उन्होंने सिर्फ कार्यक्रम में भाग लिया था। भाजपा पार्षदों ने फिर इसमें मांग की कि इसमें संबंधित निगम अधिकारी को सस्पैंड किया जाना चाहिए, जिसने की राजनीतिक कार्यक्रम के लिए सामुदायिक केंद्र की बुकिंग की। इस संबंध में जांच के आदेश दे दिए गए और कहा गया कि जांच के बाद ही कुछ होगा।
