
ऊना। जिले के अस्पतालों में प्रसूति के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों को दवाओं के अतिरिक्त शगुन के माध्यम से भी लूटा जा रहा है। मुन्ना हो या मुन्नी परिजनों को शगुन के लिए बाध्य किया जा रहा है। अस्पतालों में सफाई व्यवस्थाआें को बनाए रखने के लिए तैनात कई कर्मचारी इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं। जिसके चलते लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालत ऐसी है कि यदि एक को कुछ पैसे दे दिए तो अन्य भी मरीज की सेवा करने का हवाला देते हुए मौके पर अपना शगुन हासिल करने पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में लोगों को उनके नवजात शिशु भी शगुन लेने के बाद ही दिए जाते हैं। हालांकि, अस्पतालों के लेबर रूम के बाहर स्पष्ट लिखा होता है कि किसी को भी किसी प्रकार का शगुन न दें। फिर भी रोगियों और उनके परिजनों को लूटने का धंधा बदस्तूर जारी है। हाल ही में महिलाओं को प्रसूति के लिए अस्पतालों में लेकर गए उनके परिजनों में सरला देवी, किरण बाला, सुमन लता, सुषमा देवी, रितु शर्मा, ज्योति, मोनिका ठाकुर, सुभाष चंद, नवीन कुमार, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र हीर, मोहन लाल ने बताया कि प्रसूति के बाद सफाई कर्मचारी तब तक परिजनों को उनके नवजात शिशु नहीं देते जब तक उन्हें शगुन नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा है कि अस्पतालों में काम करने वालों को जब वेतन दिया जाता है तो लोगों से शगुन के रूप में पैसे वसूलने का धंधा बंद होना चाहिए। जिससे लोगों की जेब पर और बोझ न पड़े।
लिखित शिकायत दें तो कार्रवाई : सीएमओ
सीएमओ डा. जीआर कौशल ने बताया कि उन्हें इस संदर्भ में जानकारी मिल चुकी है। यदि मामले के संदर्भ में लिखित रूप से शिकायत आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि किसी को भी ऐसे शगुन आदि के रूप में कोई पैसा न दें।
