
ताल (हमीरपुर)। गुलेला स्कूल प्रबंधन खुद ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है। स्कूल प्रबंधन स्कूल परिसर में बने तीन कमरों को बंद करवा रहा है और कमरों के अंदर तथा आस पास मिट्टी भरवाई जा रही है। कमरों के दरवाजे तथा बाकी हिस्सा काफी हद तक ढक दिया गया है। हैरानी की बात है कि कमरों को न ही असुरक्षित घोषित किया गया है, न ही विभाग से किसी प्रकार की अनुमति ली गई है। संस्थान प्रबंधन अपनी मर्जी से ही प्रक्रिया को अंजाम दे रहा है।
हाई स्कूल गुलेला में परिसर में स्थित तीन कमरों के आस-पास ट्रैक्टरों तथा अन्य साधनों से मिट्टी डाली जा रही है। कमरों का काफी हिस्सा मिट्टी से ढक दिया गया है। भवन का निर्माण करीब 15-20 वर्ष पहले हुआ बताया जा रहा है। बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर भी कमरों का निर्माण किया गया है। कमरे पूरी तरह से सही सलामत हैं। न शिक्षा विभाग, न ही लोक निर्माण विभाग ने कमरों को असुरक्षित घोषित किया है। न ही कमरों को बंद करने के लिए विभाग से कोई अनुमति ली गई है। स्कूल परिसर में स्थित असुरक्षित घोषित भवन को नहीं गिराया गया है।
स्कूल प्रबंधन समिति ने प्रस्ताव डाला है तथा प्रक्रिया पूरी करने के लिए पत्र लिखा है। सड़क मार्ग और गांव का पानी परिसर में आ रहा था और हालत काफी खराब हो रही थी। छात्र हित में ही निर्णय लिया गया है। बारिश के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
-मंजू ठाकुर, मुख्याध्यापिका
कमरों की छत से पानी टपकता था, जिस कारण बंद किया जा रहा है। बच्चे बैठ नहीं सकते थे।
-नीरू शर्मा, अध्यक्ष, एसएमसी
किसी भी भवन को असुरक्षित घोषित करने के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित है। संस्थान या विभाग अपनी मर्जी से भवन को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो जांच के पश्चात नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
-राजेंद्र वर्मा, कार्यवाहक उपनिदेशक उच्च शिक्षा
