
कुल्लू। मानसून के बीच पारे के उछाल ने लोगों को पसीना-पसीना कर दिया है। जुलाई अंत और अगस्त में अमूमन घाटी का पारा 25 और 28 डिग्री के आसपास रहता है, लेकिन इसमें आश्चर्यजनक रूप से उछाल दर्ज किया जा रहा है। रविवार को पारा 33.5 पार गया। अगस्त के पहले हफ्ते के चार दिनों में भारी गर्मी दर्ज की गई। घाटी में बढ़ती सूरज की तपिश से पर्यावरण वैज्ञानिक भी चिंतित हो उठे हैं।
तीन अगस्त को 29.0 तथा दो अगस्त को पारा 33.7 डिग्री दर्ज किया गया। पसीने से पानी-पानी हो रहे घाटी के लोग खासे परेशान हैं। दिन के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। रविवार को जिला मुख्यालय ढालपुर, गांधीनगर, भुुंतर, पतलीकूहल, सरवरी तथा अखाड़ा बाजार सूने रहे। असर स्थानीय व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। शहरवासी दयानंद कश्यप, लाल चंद, जगदीश तथा टेक सिंह ने कहा कि कहना है कि इस बार उन्हें मानसून का अहसास तक नहीं हुआ है। अगर बारिश हुई भी है तो गरमी की तपिश भारी पड़ी है।
कुल्लू व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश सेठ ने कहा कि गरमी से बाजार की रौनक भी गायब होने से इसका असर शहर के व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा है। उधर, मौहल स्थित हिमालयन जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एसएस सांवत के अनुसार औट से लेकर रायसन रैन शेडों एरिया में आता है और यहां ऊंची पहाड़ियों के होने सेे मानसून असर नहीं छोड़ पाता है। वायुमंडल में कार्बन डाईआक्साइड गैस के बढ़ने से मौसम चक्र में बदलाव आने लगा है। उन्होंने कहा कि बीते सालों की अपेक्षा इस साल अगस्त माह का तापमान तुलानात्मक पारे से दो से तीन डिग्री अधिक चल रहा है।
