मानसूनी बारिश से तर हुआ उत्तर-पश्चिम भारत

नई दिल्ली। मानसून ने उत्तर-पश्चिम भारत को तर कर दिया है। पहाड़ी इलाके हो या फिर मैदानी। हर जगह झमाझम बारिश हुई है। पंजाब में सामान्य से 547 फीसदी ज्यादा तो उत्तराखंड में 408 फीसदी अधिक बरसात हुई है। यह आंकड़ा एक से 17 जून तक का है। इस दौरान औसत तौर देश के उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 190 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। वहीं देश भर के सिर्फ आठ फीसदी इलाकों में ही सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
राजधानी दिल्ली में भी मानसूनी बादल खूब बरसे हैं। यहां अभी तक औसत 21 मिमी की तुलना में 91.2 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। जो सामान्य से 332 फीसदी ज्यादा है। इतना ही नहीं उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश व वेस्ट यूपी में 16 जून से 17 जून की सुबह तक एक हजार फीसदी से 2160 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार देश भर में एक जून से 17 जून तक 67 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए थी जबकि 113 मिमी रिकॉर्ड हुई है। जो सामान्य से 68 फीसदी ज्यादा है। इसमें सबसे बड़ी भागीदारी उत्तर पश्चिम भारत की है। इन इलाकों में औसतन 25 मिमी बारिश होनी चाहिए थी जो 72 मिमी तक हो चुकी है। यह सामान्य से 190 फीसदी अधिक है। मध्य भारत में 182 फीसदी अधिक बारिश हुई है। वहीं पूर्वी व उत्तर पूर्वी भारत में बारिश सामान्य से 47 फीसदी कम हुई है।
बीते चौबीस घंटे में मानसून के बादल सबसे अधिक उत्तराखंड में बरसे हैं। उत्तराखंड में सोमवार सुबह 8.30 बजे तक 133 मिमी बारिश हुई थी जो सामान्य से 2160 फीसदी ज्यादा है। वहीं पंजाब, जम्मू कश्मीर व राजस्थान में बारिश इस दौरान थोड़ी कम हुई है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वोत्तर व उत्तर-पूर्व राज्यों में अभी बारिश कम हुई है जो अब बढ़ेगी। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 19 जून के बाद बारिश थोड़ी घटेगी।

क्या है आगे की भविष्यवाणी
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनाें के दौरान मुंबई, गोवा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात के ज्यादातर इलाके, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, में भारी बारिश हो सकती है। जबकि पश्चिम यूपी, राजस्थान, पंजाब व जम्मू-कश्मीर में सामान्य बारिश होगी। 20 जून के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश पर ब्रेक लगने की संभावना है।

कहां कितने फीसदी अधिक हुई बारिश
पूर्वी यूपी 103 फीसदी
पश्चिम यूपी 256 फीसदी
उत्तराखंड 408 फीसदी
हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली 215 फीसदी
पंजाब 547 फीसदी
हिमाचल प्रदेश 321 फीसदी
जम्मू-कश्मीर 78 फीसदी

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