
संतोषगढ़ (ऊना)। छतरपुर ढाडा गांव में बाघ का आतंक अभी भी कम नहीं हो पाया है। लोगों का कहना है कि इलाके में मादा बाघ अपने दो शावकों के साथ घूम रही है। पशुशालाओं में घुसकर मवेशियों को अपना शिकार बनाने वाला बाघ अब रिहायशी इलाकों में भी घुसने लगा है। बाघ के आतंक से बचने के लिए अब ग्रामीण रात को ठीकरी पहरा भी दे रहे हैं। गांव में एक-एक कर आधा दर्जन से अधिक मवेशियों को मौत के घाट उतारने वाले बाघ के आतंक से छतरपुर ढाडा के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से भी मदद की गुहार भी लगाई है।
छतरपुर ढाडा निवासी सुकेश कुमार शर्मा की पशुशाला में 23 जुलाई को बाघ ने मवेशी को मार डाला। 23 जुलाई की घटना के बाद ग्रामीणों ने घटना वाली जगह कुछ ऐसे निशान भी देखे, जो तेंदुए या मादा बाघ की क्षेत्र में उपस्थिति को दर्शा रहे थे। सुकेश शर्मा ने बताया कि वीरवार देर रात तीन बजे के करीब उनके आंगन में बाघ ने उनके पालतू कुत्ते को घायल कर दिया। उन्होंने बताया कि जब तक लोग इकट्ठे हुए तो बाघ अंधेरे में होली खड्ड की ओर गायब हो गया। गांव के उपप्रधान मोहिंद्र मोहन का कहना है कि अब लोग रात के वक्त ठीकरी पहरा दे रहे हैं। छतरपुर के पप्पू, ज्ञान सिंह, मूलराज, सुभाष कुमार, सकुेश शर्मा, नीरज कुमार, सुरिंद्रपाल, राकेश कुमार, रोशन लाल, सुदेश कुमारी, संध्या देवी, रामप्यारी, चांदरानी, बलबीर चंद, उपप्रधान मोहिंद्र मोहन ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में आतंक फैला रहे बाघ को पिंजरे में काबू किया जाए।
ग्रामीणों ने डाला था प्रस्ताव
23 जुलाई की घटना के बाद ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने 25 जुलाई को ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित कर वन विभाग के डीएफओ एवं वन मंडल अधिकारियों से लोगों एवं मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी। प्रस्ताव पारित करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों में ग्राम पंचायत प्रधान अनिल कुमार शर्मा, उपप्रधान मोहिंद्र मोहन, पंचायत सचिव निर्मला देवी, वार्ड पंच जगतराम, विजय कुमारी, बीना देवी, चरणदास, बीना कुमारी भी शामिल थे।
कोट्स
ग्रामीणों से ऐसी सूचना मिली है कि क्षेत्र में एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ घूम रही है। जांच के लिए विभाग के एसीएफ को कहा गया है। अगर ऐसा है तो उन्हें काबू करने के लिए विभागीय विशेषज्ञों से भी राय मांगी जाएगी।
-आरके डोगरा डीएफओ
