
अल्मोड़ा। जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के एकीकृत आवास और मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम (आईएचएसडीपी) के तहत तीन साल बाद भी पात्र लोगों के भवन नहीं बन सके हैं। इससे नाराज महिलाओं ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट प्रांगण में धरना दिया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्य पूरा कर आवास आवंटित नहीं किए गए तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।
पालिका को आवास निर्माण के लिए मई 2010 में शासन से 8.33 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इस धनराशि से मलिन बस्तियों में गरीबों के लिए 217 आवासों का निर्माण और अन्य काम होने थे। पहली किश्त में शासन से पालिका को 334.32 लाख मिले। पालिका ने निर्माण एजेंसी यूपीपीसीएल को 277.28 लाख रुपये अवमुक्त किए। निर्माण एजेंसी ने मात्र 28 आवास बनाए। इनमें भी काफी कमियां हैं। पालिका और कार्यदायी संस्था की लापरवाही से गरीब परिवार आवासहीन हो गए हैं और किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं।
इससे गुस्साई महिलाएं शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने पालिका, प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओें ने कहा कि आवास देने के नाम पर उनके पुराने मकान भी तोड़ दिए गए हैं, जिससे उनके परिवार बेघर हो गए हैं। तीन वर्ष का समय बीत गया है, न तो आवास दिए गए हैं और न ही दूसरे स्थानों पर रहने के लिए किराया दिया जा रहा है। ठंड के मौसम में उनके परिवारों को दिक्कतें हो रही हैं। चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण पूरा कर जल्द आवास आवंटित नहीं किए गए तो वह आंदोलन को मजबूर होंगी। प्रदर्शन में राजपुर और भियारखोला की महिलाएं शामिल हुई।
