
कुल्लू। पहाड़ की चोेटी पर विराजमान अधिष्ठाता बिजली महादेव के आसपास स्थापित टावरों का देव समाज ने कड़ा विरोध किया है। भक्तों का कहना है कि यहां हर साल शिवलिंग पर बिजली गिरती थी तथा इससे शिवलिंग टुकड़ों में बंट जाता था। इसके बाद इसे मक्खन से फिर जोड़ दिया जाता था। लेकिन अब करीब पंद्रह सालों से यह चमत्कार नहीं हो रहा है। इसके पीछे देव समाज यहां स्थापित टावरों को मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि टावरों के चलते पवित्रता भंग हो रही है। भक्तों के मुताबिक सुख समृद्धि और क्षेत्र की शांति के लिए महादेव के शिवलिंग पर आकाशीय बिजली का गिरना शुभ माना जाता है लेकिन बीते डेढ़ दशक से यहां बिजली नहीं गिरी है। पूर्व में यहां हर तीन साल के भीतर आकाशीय बिजली गिरती रही है।
महादेव क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हुई छेड़खानी पर अब उंगलियां उठना शुरू हो गई हैं। मंदिर कमेटी का कहना है कि मंदिर के साथ बिना किसी अनुमति के मोबाइल टावर स्थापित किए हैं। देवता के विरोध करने पर भी यह टॉवर जस के तस यहां हैं। भुंतर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भी इन टावरों को हवाई उड़ान के लिए बाधा माना है। इस पर डीसी कुल्लू ने सुरक्षा के लिहाज से तुरंत हटाने के आदेश दिए थे। मोबाइल टावरों के साथ यहां दूरदर्शन टावर भी लगा है। विरोध के बाद हालांकि एक कंपनी ने यहां लगे टावर को हटा दिया था लेकिन दो टावर अभी भी यहां खड़े हैं। बिजली महादेव के कारदार अमरनाथ ने कहा कि मंदिर परिसर में टावर अभी स्थापित हैं। एक टावर को देवता की मनाही और मंदिर कमेटी के विरोध के बाद हटा दिया था। कमेटी, कारकून और हारियान इन टावरों का विरोध करते हैं। कंपनी टावरों को हटाने पर अड़ी रही तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। डीसी राकेश कंवर ने कहा कि टावरों को लेकर दी गई एनओसी की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि टावरों के लगने के बाद क्षेत्र में क्या असर पड़ा है।
