
केलांग। लेह लद्दाख में भारतीय सीमा पर चीनी सेना की घुसपैठ की खबरों के बीच मनाली-लेह सामरिक मार्ग को जल्द बहाल करने के लिए रक्षा मंत्रालय से सीमा सड़क संगठन पर लगातार दबाव बना हुआ है। संगठन के हिमांक प्रोजेक्ट ने श्रीनगर-जोजिला दर्रा-लेह राष्ट्रीय मार्ग को बीते 10 अप्रैल को खोल दिया था। बीते साल दिसंबर माह में बंद हुए समुद्रतल से 13500 फुट ऊंचे रोहतांग दर्रा के दोनों छोर करीब चाह माह बाद बुधवार रात करीब 11 बजे फिर आपस में मिल गए हैं। हालांकि सीमा सड़क संगठन ने रोहतांग दर्रा को वाहनों की आवाजाही के लिए अभी अधिकारिक तौर पर खुलने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन बीआरओ ने दावा किया है कि एक सप्ताह के भीतर इस मार्ग को बड़े वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।
सीमा सड़क संगठन की नजरें अब 16 हजार फुट ऊंचे बारालाचा दर्रा पर टिकी है। बारालाचा दर्रा खुलते ही मनाली-लेह मार्ग सेना के वाहनों के लिए बहाल हो जाएगा। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल योगेश नायर ने बताया कि रोहतांग के बाद अब संगठन ने अपनी पूरी ताकत बारालाचा दर्रा को बहाल करने में लगा दी है। कर्नल ने दावा किया है कि सबकुछ ठीक रहा तो 15 मई से पहले बारालाचा दर्रा को खोल दिया जाएगा। उनकी मशीनें बर्फ हटाते हुए सेना के अस्थाई कैंप मेंहदीनगर से आगे निकल गई हैं। वहां से बारालाचा करीब 15 किलोमीटर दूर है। बीआरओ के सूत्रों ने बताया कि लद्दाख में भारतीय सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद मनाली-लेह मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए रक्षा मंत्रालय से संगठन को निर्देेश जारी हुए हैं। कारगिल युद्ध के दौरान भी यह मार्ग भारतीय सेना के लिए लाइफ लाइन साबित हो चुका है। लिहाजा एक दो दिन के भीतर सीमा सड़क संगठन अपनी अधिकांश मशीनों को बारालाचा दर्रा की तरह शिफ्ट करने की तैयारी में है।
