मंडी समिति ऊना को 35 लाख का झटका

संतोषगढ़ (ऊना)। प्रदेश में सब्जियों एवं फलों पर लागू एक फीसदी मार्केट फीस हटा दिए जाने से प्रदेश के सब्जी उत्पादक जिलों ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा की मंडी समितियों की सालाना आमदनी में लाखों रुपये की कमी हो जाएगी। वहीं इससे मंडी समिति ऊना की सालाना आय में लगभग 35 लाख रुपये का घाटा पड़ेगा। सालाना आय में होने वाली कमी को लेकर अब मंडी समिति के अधिकारियों को भी सोचना पड़ रहा है कि एक फीसदी रकम के वसूल न हो पाने से होने वाले घाटे को भविष्य में किन-किन साधनों के जरिए पूरा किया जाए। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सुझाव पर प्रदेश सरकार ने राज्य के एपीएमसी एक्ट में संशोधन कर प्रदेश में 90 उत्पादों जिन पर मार्के ट फीस देय है, इनमें से 45 आइटम मार्के ट फीस के दायरे से बाहर कर दिए हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने सेब पर एक फीसदी फीस पहले की तरह ही लेने का फैसला लिया है। प्रदेश में फल-सब्जियों पर लागू एक फीसदी मार्केट फीस खत्म कर दिए जाने से संबंधित अधिसूचना भी प्रदेश सरकार की ओर से जारी कर दी गई है।

क्या कहते हैं महासचिव
प्रदेश सरकार की ओर से नई अधिसूचना के जारी होने की पुष्टि मंडी समिति के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने भी की है। उन्होंने कहा कि फीस के खत्म होने से सब्जी एवं फल आढ़तियों का कमीशन छह फीसदी से कम होकर पांच फीसदी रह जाएगा। इन कारोबारियों पर नियंत्रण मंडी समिति का ही पहले की तरह रहेगा।

क्या कहते हैं मंडी समिति अध्यक्ष
मंडी समिति के अध्यक्ष शिव कुमार सैणी का कहना है कि फल-सब्जियों से एक फीसदी फीस को खत्म कर दिए जाने से मंडी समिति की सालाना आय लगभग 35 लाख रुपये कम हो जाएगी। सैणी का कहना है कि मार्केट फीस खत्म किए जाने से जिन जिलों की मंडियों में सेब की खरीद-फरोख्त नहीं होती, उनकी आय प्रभावित होगी।

मंडी समिति बिलासपुर के अध्यक्ष विवेक कुमार का कहना है कि फल-सब्जियों से मार्केट फीस हटा दिए जाने से राजस्व में कमी तो आएगी। उन्होंने कहा कि मंडी समिति की आय बढ़ाने के लिए दूसरे संसाधनों को खोजा जाएगा।

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