
भोरंज (हमीरपुर)। ….तो क्या फायदा फिर करोड़ों रुपए की लागत से बनी पेयजल योजना का? यदि गर्मियों के मौसम में ही लोगों को राहत नहीं मिल पाए। गर्मियों के मौसम में तीसरे दिन गांवों में पेयजल आपूर्ति हो रही है तथा कभी कभार तीसरे दिन भी नाम मात्र गिनती के नलों से टपकता है। विभाग ने अतिरिक्त पानी की मांग की है लेकिन पूरी होती नहीं दिख रही। वर्ष 2007 में बमसन मेवा लगवालती पेयजल योजना को 70 करोड़ रुपए से अधिक लागत से तैयार शुरू किया गया था। इसके तहत 369 बस्तियों को पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति कर पेयजल समस्या को दूर किया जाना था परंतु समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है।
पेयजल स्रोत में पानी की कमी नहीं है लेकिन फिर भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही। योजना मेें प्रतिदिन 44 से 46 लाख लीटर पानी प्रोजेक्ट से आता है। जबकि क्षेत्र में प्रतिदिन 55 से 58 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है। गर्मियों के मौसम में लोकल स्कीमों के सूखने पर दूसरी बस्तियों को भी इसी योजना से जोड़ दिया जाता है जिस कारण समस्या अधिक बढ़ जाती है। विभाग ने समस्या के समाधान के लिए दस लाख लीटर अतिरिक्त पानी की मांग की है।
बमसन मेवा लगवालती स्कीम में जाखू से पानी लिफ्ट किया गया है। यहां से बौड़ू में लिफ्ट किया गया है और यहां से ऊहल तमलाणा से पानी को अवाहदेवी में लिफ्ट किया गया है। अवाहदेवी से पानी हाइट ग्रेविटी से कामलू गलू, द्रूण, लोकल अवाहदेवी को आता है। जाखू, बौडू़, ऊहल या मतलाणा में से एक भी स्थान पर कम वोल्टेज की समस्या आने पर पानी लिफ्ट नहीं होगा और पेयजल के लिए हाहाकार मच जाता है।
उधर, प्रोजेक्ट इंजीनियर कुलधीर सिंह का कहना है कि कम वोल्टेज के बावजूद क्षेत्र में मांग के अनुसार पानी मुहैया करवाया जा रहा है। आईपीएच विभाग भोरंज के एसडीओ केएस पठानिया का कहना है कि पानी की मांग को देखते हुए 10 लाख लीटर और पानी की मांग की गई है।
