भाष्कर फैला रहे शिक्षा का उजाला

कर्णप्रयाग। ग्रीष्मकालीन अवकाश में जहां छात्र सहित शिक्षक आराम कर रहे हैं, वहीं शिक्षक भाष्करानंद डिमरी गरीब और निमभन तबके के बच्चों को आखर ज्ञान करवाकर अवकाश का सदुपयोग कर रहे हैं। वह भी बिना किसी लाभ के।
राजकीय इंटर कालेज सिमली में हिंदी के प्रवक्ता डिमरी भले ही स्कूल में 11वीं और 12वीं के बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन यहां उन्होंने छह से नौ तक के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा लिया है। उन्होंने अभिभावकों से बात की और मिलन केंद्र में पाठशाला खोल दी। वे सुबह आठ से दस बजे तक गरीब बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित और सामाजिक विषय का अध्ययन करा रहे हैं। डिमरी जीआईसी सिमली में कक्षा नौ की छात्रा पूजा को अध्ययन के लिए आर्थिक मदद भी कर रहे हैं।

एड्स के प्रति किया जागरूक
शिक्षक भाष्करानंद डिमरी समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं, जिसमें एड्स प्रमुख है। डिमरी अब तक पांच दर्जन गांवों का भ्रमण कर 100 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।

निर्धनता के कारण ट्यूशन पढ़ना नहीं हो सकता। घर में भी कोई पढ़ाने वाले नहीं। हम पढ़ने में बहुत पीछे हैं, लेकिन गुरुजी ऐसा नहीं मानते। उनके अनुसार हम भी कुछ बन सकते हैं, जिससे हमें प्रेरणा मिलती है।
-वर्षा, आयुष छात्र

कक्षा छह में प्रवेश लेने वाले गरीब और अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं का बेसिक ज्ञान न्यूनतम है। ऐसे में इन बच्चों को सिखाने और पढ़ाने का निर्णय लिया, जिसके लिए मिलन केंद्र को चुना है। यहां अनुसूचित जाति के 25 बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहा हूं।
-भाष्करानंद डिमरी, अध्यापक जीआईसी सिमली।

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