भारतीय हॉकी को शीर्ष विदेशी कोच की जरूरत’

भारतीय हॉकी को शीर्ष विदेशी कोच की जरूरत’

नई दिल्ली: भारतीय हॉकी टीम के कोच सरदार सिंह ऑस्ट्रेलिया के रिक चार्ल्सवर्थ की इस बात से सहमत हैं कि आठ बार के ओलम्पिक चैम्पियन भारत को आधुनिक हॉकी के साथ कदम मिलाने के लिए शीर्ष विदेशी कोच के मार्गदर्शन की जरूरत है। हॉकी इंडिया (एचआई) ने माइकल नॉब्स के स्थान पर किसी विदेशी कोच की खोज शुरू कर दी है। नॉब्स को खराब प्रदर्शन के कारण बर्खास्त कर दिया गया है।

चार्ल्सवर्थ ने 2008 में भारतीय टीम को प्रशिक्षित किया था। उन्होंने कहा कि देश के कोच आधुनिक हॉकी के लिहाज से टीम को प्रशिक्षित करने की काबिलियत नहीं रखते। भारतीय हॉकी के हाई परफॉरमेंस निदेशक हॉलैंड के रोलेंट ओल्टमंस को फिलहाल भारतीय टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है और ओलम्पिक में स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे महाराज कौशिक को राष्ट्रीय कोच नियुक्त किया गया है। सरदार ने कौशिक की नियुक्ति का स्वागत किया है लेकिन साथ ही कहा है कि भारतीय हॉकी को किसी शीर्ष विदेशी कोच के मार्गदर्शन की भी जरूरत है।

सरदार ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘कौशिक देश के सबसे अच्छे कोच में से एक हैं और ओल्टमंस के साथ वह भारतीय हॉकी को आगे ले जाने का काम करेंगे लेकिन मेरा मानना है कि हमें ओल्टमंस जैसे किसी महारथी की जरूरत है।’’ नॉब्स के साथ अपने अनुभव के बारे में पूछे जाने पर सरदार ने कहा कि नॉब्स की देखरेख में टीम ने काफी कुछ सीखा है लेकिन परिणाम उसके हक में नहीं रहे हैं।

सरदार ने कहा, ‘‘नॉब्स अच्छे कोच थे। आप उनके सामने अपनी समस्या खुलकर रख सकते थे। उन्होंने सबको बराबर निगाह से देखा और वह अनुभवी खिलाडिय़ों के साथ सख्ती से पेश आए। वह एक कोच होने के साथ-साथ दोस्त भी थे।’’ नॉब्स की देखरेख में भारतीय टीम लंदन ओलम्पिक में अपने सभी मैच हार गई और टीम निराशाजनक तौर पर 12वें स्थान पर रही। बीते महीने भारत को एफआईएच वल्र्ड लीग राउंड-3 में भी निराशा हाथ लगी और वह आठ टीमों में से छठे स्थान पर रही।

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