
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के फौलादी इरादे और जज्बे को मजबूती देते हुये आखिरकार प्रथम स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड में समुद्र में उतार दिया गया। रक्षा मंत्री एके एंटनी की पत्नी एलिजाबेथ एंटनी ने इसका उद्घाटन किया।
इस गरिमामय और ऐतिहासिक अवसर पर रक्षामंत्री समारोह के मुख्य अतिथि थे। जहाजरानी मंत्री जी.के. वासन ने समारोह की अध्यक्षता की। इस एतिहासिक समारोह के गवाह के रूप में नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी इस विमानवाहक पोत के निर्माता कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के महाप्रबंधक कोमोडोर काॢतक सुब्रमण्यम सहित कई अन्य नौसैनिक अधिकारी शामिल थे।
वहीं चीन के नौसैन्य अनुसंधान संस्थान के उपाध्यक्ष सीनियर कैप्टन झांग जुनशे ने सरकारी चैनल सीसीटीवी से कहा, ‘इससे भारतीय नौसेना को खासी ताकत मिली है। इससे अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के बाद भारत पांचवां ऐसा देश बन गया है जिसके पास इस तरह की क्षमता होगी।’ उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना चीन पर बढ़त कायम कर लेगी क्योंकि इस साल के आखिर तक उसके पास दो विमान वाहक पोत होंगे।
भारतीय नौसेना को आईएनएस विक्रमादित्य रूस से मिल जाएगा और यह आईएनएस विराट के साथ भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा। विक्रांत के 2018 तक परिचालन में आने की उम्मीद है। झांग ने कहा, ‘इसका मतलब यह है कि भारत इस साल के आखिर तक एशिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास दो विमानवाहक पोत होंगे। इससे भारतीय नौसेना की संपूर्ण ताकत और खासकर शक्ति प्रदर्शन की क्षमताओं में इजाफा होगा।’ झांग ने इस क्षेत्र में विमानवाहक पोतों की संख्या बढ़ाने की होड़ लगने की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि भारत और चीन के पास अधिक पोत का होना सही है क्योंकि दोनों विशाल तटीय इलाके से जुड़े हैं और दोनों की आबादी बहुत ज्यादा है। पिछले साल चीन ने अपने पहले विमानवाहक पोत ‘लियोनिंग’ का जलावतरण किया था। इस पोत की वाहक क्षमता 50,000 टन है तथा इस पर एकसाथ करीब 30 विमान मौजूद रह सकेंगे।
