
उत्तरकाशी। शुरूआती बरसात ने ही मनेरी भाली प्रथम और द्वितीय चरण की टरबाइनों के चक्के थामने शुरू कर दिए हैं। पिछले वर्ष की बाढ़ में जमा मलबा अब बरसात में बहकर आने से इन दोनों परियोजनाओं में 12 घंटे से अधिक समय तक विद्युत उत्पादन ठप रहा। रविवार शाम को भागीरथी के पानी में गाद की मात्रा कम होने पर ही यहां उत्पादन शुरू किया जा सका।
मनेरी बैराज में शनिवार की देर रात दो बजे गाद का लेबल ढाई हजार पीपीएम के पार पहुंचने पर 90 मेगावाट के तिलोथ पावर हाउस में उत्पादन बंद करना पड़ा। इससे पहले यहां तीनों टरबाइनें फुल लोड पर बिजली पैदा कर रही थीं। सुबह के समय तो नदी में गाद का लेबल छह हजार पीपीएम तक मापा गया। रविवार शाम चार बजे गाद की मात्रा कम होने पर तिलोथ विद्युतगृह में दोबारा उत्पादन शुरू किया गया। इधर 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू में रविवार सुबह चार बजे विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। इससे पहले धरासू विद्युतगृह में 76-76 मेगावाट की तीन टरबाइनों से 181 मेगावाट उत्पादन लिया जा रहा था। यहां भी शाम चार बजे दो टरबाइनों से 120 मेगावाट उत्पादन बहाल कर लिया गया।
वार्षिक लक्ष्य पूरा करने में मुश्किलें
उत्तरकाशी। अभी असी गंगा व भागीरथी के प्रवाह पथ पर बीते साल की बाढ़ का भारी मलबा जमा है। बरसात में इस मलबे के आने से परियोजनाओं में उत्पादन हानि तय मानी जा रही है। ऐसे में मनेरी भाली प्रथम चरण से 475 मिलियन यूनिट तथा स्टेज टू से 1300 एमयू उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य हासिल करने में मुश्किल आ सकती है।
कोट-
भागीरथी में गाद की मात्रा बढ़ने पर विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। रविवार शाम चार बजे दोबारा उत्पादन शुरू कर लिया गया है। 12 घंटे परियोजना बंद रहने से करीब 2.2 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन की हानि हुई।- विपिन बिहारी सिंघल, डीजीएम धरासू विद्युत गृह।
ढाई हजार पीपीएम पर तो परियोजना चल जाती है, लेकिन शनिवार की देर रात गाद की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ने पर उत्पादन बंद करना पड़ा। सुबह के समय तो गाद का लेबिल करीब छह हजार पीपीएम दर्ज किया गया। रविवार शाम 4 बजे गाद कम होने पर उत्पादन शुरू कर लिया गया है।- केके जायसवाल, ईई जल विद्युत निगम।
