
नई दिल्ली के द्वारका स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने के मामले में पन्नू (50) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने उसे लड़की से दुष्कर्म, साथियों को सामूहिक दुष्कर्म की छूट देने, धमकी देने, आपराधिक साजिश, बंधक बनाने और पीड़िता को वेश्यावृत्ति में धकेलने में दोषी करार दिया।
अदालत ने दोषी पर कुल 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषी शख्स उत्तर प्रदेश के उन्नाव का रहने वाला है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट्ट ने पन्नू को आपराधिक साजिश के लिए दस साल, दुष्कर्म के लिए दस साल, पीड़िता को वेश्यावृत्ति में धकेलने के लिए 14 साल और सामूहिक दुष्कर्म के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने कहा कि दोषी को सुनाई गईं सजाएं एक साथ नहीं चलेंगी। यानी उसे एक के बाद एक सजा काटनी होगी।
पीड़ित लड़की ने अदालत को बताया कि पिता की मौत के बाद उसका ताऊ व ताई वर्ष 2003 में उसे अपने साथ दिल्ली ले आए थे।
मां उसके परिवार को छोड़कर चली गई थी। आरोप था कि पन्नू ने नाबालिग भतीजी से कई बार दुष्कर्म किया। वह उसे मारता पीटता और जान से मारने की धमकी देता था।
लड़की एक घर पर नौकरानी का काम करती थी। पीड़िता की कहानी जानने के बाद उसकी मालकिन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी।
इसके बाद थाना दिल्ली कैंट पुलिस ने पन्नू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी का अपराध बेहद घृणित, क्रूरतापूर्ण और बर्बर है।
भतीजी के पिता की मौत के बाद दोषी शख्स उसे अपने साथ देखभाल के लिए दिल्ली लाया लेकिन उसने (पन्नू) उसे अपनी हवस का शिकार बनाया।
इतना ही नहीं दोषी ने पीड़िता को शराब पीने और उसके बाद नग्न डांस करने पर मजबूर किया। उसने अपने साथियों को पीड़िता से सामूहिक दुष्कर्म करने की छूट दे दी।
दोषी को पीड़िता पर दया नहीं आई और उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया। दोषी ने यह सब अपनी पत्नी की मूक सहमति से किया।
