
ऊना। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) में हुई अनियमितताओं के शिमला से दोबारा जांच के आदेश हुए हैं। मामले पर प्रधान सचिव शिक्षा के संजयमूर्ति और शिक्षा निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। निदेशालय से उप निदेशक को मामले की दोबारा जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इस पर सोमवार को शिक्षा उप निदेशक निर्मल रानी ने खुद स्कूल में जाकर पूरे मामले की जांच की।
शिकायतकर्ता प्रवक्ता के फिर से बयान दर्ज किए गए। इससे पूर्व उप निदेशक ने मामले की जांच के लिए जोह स्कूल के प्रधानाचार्य यशपाल सिंह को जांच अधिकारी लगाया था। यशपाल सिंह ने 76 पन्नों की रिपोर्ट तैयार करके उप निदेशक को सौंपी थी। उप निदेशक ने रिपोर्ट शिमला प्रेषित की। निदेशालय ने तर्क दिया कि एक समकक्ष अफसर से उनके समकक्ष पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ जांच नहीं करवाई जा सकती। ऐसी जांच में पारदर्शिता की उम्मीद नहीं हो सकती। निदेशालय ने उप निदेशक को स्वयं मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा।
क्या है मामला
इस स्कूल के ही एक प्रवक्ता ने प्रधान सचिव शिक्षा, शिक्षा निदेशक, शिक्षा बोर्ड और एसपी ऊना के पास अनियमितताओं की शिकायत की थी। पता चला है कि अब शिकायतकर्ता ने शिकायत की एक प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी है। 13 जून को भेजी जांच रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल में शैक्षणिक सत्र 2012-13 की दस जमा एक कक्षा के 11 बच्चों की उत्तर पुस्तिकाओं में लिखाई में भिन्नता पाई गई है। सत्र 2011-12 में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। रिजल्ट रजिस्टर पर टेंपरिंग की गई है। फ्लूड का इस्तेमाल हुआ है। एक फेल विद्यार्थी को कक्षा में प्रथम घोषित किए जाने का भी आरोप है। 60 से अधिक अनुत्तीर्ण छात्रों को नियमों के विरुद्ध अधिक कृपांक देकर पास किया गया। स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज विदड्राल रजिस्टर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। अब दोबारा जांच से स्कूल प्रशासन हिल गया है।
तैयार हो रही जांच रिपोर्ट : उप निदेशक
शिक्षा उप निदेशक निर्मल रानी ने कहा कि निदेशालय ने इस मामले की दोबारा जांच करने को कहा है। निदेशालय ने उन्हें स्वयं जांच करने के निर्देश दिए हैं। वह जांच के लिए सोमवार को स्वयं स्कूल में गईं। शिकायतकर्ता प्रवक्ता के बयान दर्ज किए गए हैं।
रिकार्ड से छेड़छाड़ के आरोप
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ऊना में अनियमितताओं की जांच के दौरान जांच अधिकारी यशपाल सिंह की ओर से सील किए गए रिकार्ड से छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। पता चला है कि शिकायतकर्ता ने पूछताछ के दौरान उप निदेशक को बताया कि 21 जून को रिकार्ड से छेड़छाड़ करके तत्कालीन प्रधानाचार्य ने कई जगह हस्ताक्षर किए हैं। और भी कई पन्नों पर कुछ पंक्तियां लिखी हैं।
सूत्र बताते हैं कि पूरे रिकार्ड में स्याही का इस्तेमाल कितने समय पूर्व हुआ, इसका पता लगाने के लिए रिकार्ड को एफएसएल भेजा जा सकता है। पूर्व जांच अधिकारी यशपाल सिंह ने यह रिकार्ड स्कूल प्रधानाचार्य को सुरक्षित रखने को कहा था। उधर, स्कूल प्रधानाचार्य राजेंद्र कौशल ने कहा कि रिकार्ड उनके कब्जे में था। रिकार्ड से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।
पुलिस और शिक्षा बोर्ड ने भी की थी जांच
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) में हुई अनियमितताओं की जांच ऊना पुलिस और शिक्षा बोर्ड से आई टीम ने भी की थी। परीक्षा प्रणाली के संदर्भ में खास जानकारी के अभाव में हालांकि पुलिस के हाथ कुछ खास साक्ष्य नहीं लगे। आंसरशीट्स पर प्रश्नों के हल उत्तरों में लिखाई में भिन्नता की भी पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
शिक्षा बोर्ड की ओर से इसी साल 22 अप्रैल को सहायक सचिव केएस चौहान के नेतृत्व में टीम आई थी। शिक्षा बोर्ड से आई टीम ने जांच प्रक्रिया निपटाने के बाद रिजल्ट रजिस्टर समेत अन्य कई दस्तावेजों पर कई जगह रेड लाइन खींचने के साथ प्रश्नवाचक चिह्न भी लगाए। खामियां पाए जाने के बाद रिकार्ड धर्मशाला तलब किया था।
जांच के घेरे में स्कूल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ऊना (बाल) के जांच के घेरे में आने से अनियमितताओं में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए हैं। जमा एक की परीक्षा में फर्जीवाड़े के साथ साथ स्कूल परिसर में लगे शीशम के भीमकाय पेड़ को काटकर इसक ी लाखों रुपये की लकड़ी को खुर्द-बुर्द करने के भी आरोप हैं। लकड़ी के गोलमाल मामले की जांच शिक्षा निदेशालय के निर्देशों पर राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके चावला कर रहे हैं। चावला ने फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ स्कूल स्टाफ के बयान भी दर्ज किए हैं। चावला जांच रिपोर्ट सीधे शिक्षा निदेशालय को भेजेंगे। घपलों के कारण चर्चा में आए स्कूल प्रशासन की खासी किरकिरी हुई है।
