
नई दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति पर बिना किसी आधार के अन्य महिला से अवैध संबंध का आरोप लगाना क्रूरता की श्रेणी में आता है।
यह क्रूरता भी तलाक का आधार हो सकती है। अदालत ने उक्त तर्क देते हुए पति को प्रदान तलाक के फैसले पर मोहर लगा दी।
न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट्ट व न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की खंडपीठ ने फैसले में फैमिली कोर्ट द्वारा प्रदान तलाक को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका खारिज कर दी।
खंडपीठ ने कहा कि याची पत्नी ने पति व उसके परिवार को कई प्रकार से प्रताड़ित किया और उनके बीच दंपति के संबंध भी काफी अरसे से नहीं हैं।
पत्नी ने पति पर बिना आधार के भाभी-भांजी के साथ अवैध संबंध का आरोप लगा दिया। यह क्रूरता की श्रेणी में आता है।
याची जिरह के दौरान अपने आरोप सही साबित नहीं कर पाई, लेकिन आरोप से पति के पूरे परिवार व उसके भाई का जीवन प्रभावित और परेशानी भरा हो गया।
पति का भाई विवाद, अपमान व बदनामी से बचने के लिए परिवार से अलग रहने लगा। इसके बावजूद याची ने आरोप लगाना जारी रखा। यह सरासर मानसिक क्रूरता है।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मानसिक प्रताड़ना वैवाहिक जीवन को खंडित कर देती है जो तलाक का कारण बन सकती है।
पति ने कहा था कि पत्नी का रवैया परिवार के सदस्यों से झगड़ालु, दोस्तों, रिश्तेदारों व पड़ोसियों के प्रति खराब व्यवहार, अलग रहने के लिए दबाव, पूरा वेतन देने की मांग, फर्जी मामले में फंसाने की धमकी, दंपति के संबंध स्थापित करने से इंकार करने आदि का रहा है।
वहीं, पत्नी ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद से ही उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया और पति अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता रहा।
याची अपना आरोप साबित नहीं कर पाई और ऐसे में फैमिली कोर्ट का तलाक संबंधी फैसला क्रूरता के तहत उचित है।
