
कुल्लू। जिले की ऊंची चोटियों में हो रही बर्फबारी व मैदानी क्षेत्रों में बारिश से किसान-बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। बागानों में पौधे लगाने के कार्य ने जोर पकड़ लिया है। वहीं जड़ सड़न व मूल संधि गलन की चपेट में भी पौधे आने से बागवान चिंतित हैं।
फल-फूलों की घाटी कुल्लू मेें हो रही बारिश और बर्फबारी बागवानी कार्य करने के लिए संजीवनी बनकर आ रही है। बागवान थोड़ा सा मौसम खुलने पर अपने बागानों की ओर कूच कर रहे हैं। सेब के पौधों में तौलिए गोबर और खाद आदि डालने का कार्य प्रगति पर है। कालर रॉट रोग ने बागवानों को परेशानी में डाल दिया है। प्रगतिशील बागवान होतम राम, श्याम सुंदर, इंद्र देव, नानक चंद, सोहन लाल, देवी राम व किशन सिंह आदि का कहना है कि अधिकतर पौधे 45 फीसदी जड़ सड़न व मूल संधि गलन की चपेट में आग गए हैं। उधर, बागवानी अनुसंधान केंद्र सेऊबाग के प्रभारी वैज्ञानिक डा. डीआर खजूरिया ने बागवानों को सलाह दी है कि जड़ सड़न व मूल संधि गलन से ग्रस्ति पौधों के भाग व जड़ों को खोलें। सड़ी हुई जड़ों को काट दें व कटे भाग पर चौबाटिया लेप लगाएं। उन्होंने कहा कि बागवान मिट्टी चढ़ाने से पहले 15-20 ग्राम वैविस्टिन प्रति 15-20 लीटर पानी में घोलकर प्रति पौधे में डालें। कॉलर रॉट से ग्रस्ति पौधों की सड़ी छाल को चाकू से छीलें व लेप लगाएं। खुले भाग को बंद करने से पहले रिडोमिल एमजेड 75 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर प्रति पौधे में डालें व उसके बाद मिट्टी चढ़ाएं।
