

अदालत ने बच्ची से क्रूरतापूर्ण व्यवहार के लिए रोहिणी स्थित एक अस्पताल की मिड वाइफ संतोष और सहयोगी ओटी अटेंडेंट इस्लामुद्दीन व अनीता को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तीन-तीन माह कैद की सजा सुनाई है।
वहीं, अदालत ने ऐसे मामलों के संबंध में कोई कानून नहीं होने से तीनों को आपराधिक साजिश, अपहरण, बच्चों को छोड़ देने और मानव तस्करी के आरोपों से बरी कर दिया।
अब तक क्यों नहीं बना कोई कानून?

अदालत ने कहा कि आयोग ने 1993 में सिफारिश की थी और सरकार ने आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। पेश मामले के मुताबिक, 5 जुलाई 2013 को बच्ची की मां उसे संतोष को सौंपकर चली गई थी।
आरोप है कि संतोष ने बच्ची को एक लाख रुपये में बेचने की योजना बनाई, लेकिन इससे पहले ही पुलिस को भनक लग गई। पुलिस ने महिला सिपाहियों को नकली ग्राहक बनाकर भेजा और संतोष को गिरफ्तार कर लिया। बाद में इस्लामुद्दीन व अनीता को गिरफ्तार किया गया।
