बागवानों और उद्यान विभाग में ठनी

भल्याणी (कुल्लू)। जिला में हुई इस बार सेब की उपज को लेकर बागवानों और उद्यान विभाग में ठन गई है। बागवानों का आरोप है कि उद्यान विभाग ने गलत आंकड़े पेश कर उन्हें सेब के मिलने वाले दाम लुढ़का दिए। कहा कि उद्यान विभाग ने इस वर्ष घाटी में 2.24 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होने का ढिंढोरा पीटकर सेब के दामों को जमीं पर ला दिया। इसके चलते बागवानों को करोड़ों की चपत लग गई है। हालांकि, उद्यान विभाग की मानें तो ऐसा बागवानों की ओर से मंडियों में कच्चा माल लेकर आने से हुआ है। कुल्लू फलोत्पादक संघ के अध्यक्ष मोहेंद्र उपाध्याय ने बताया कि विभाग ने घाटी में बंपर फसल का हल्ला कर क्षेत्र के बागवानाें की आर्थिकी को कमजोर कर दिया है।
इस हल्ले से सीजन के शुरूआती दौर से ही सेब के दाम तेजी नहीं पकड़ पाए। अब विभाग पलटकर घाटी में 2 लाख मीट्रिक टन सेब की उपज होने की बात कह रहा है। उद्यान विभाग के उप निदेशक बीसी राणा ने बताया कि यह आंकड़ा विभाग का अनुमानित आंकड़ा होता है। सेब के दामों में गिरावट विभागीय हल्ले से नहीं अपितु बागवानाें की जल्दबाजी में किए गए सेब के तुड़ान की वजह से आई। राणा ने माना कि उपज का अनुमान 24 हजार मीट्रिक टन घट गया है। अब अनुमान 2 लाख मीट्रिक टन का है। फलोत्पादक संघ के अध्यक्ष मोहेंद्र उपाध्याय ने दावा किया है कि जिला में इस बार 2 लाख मीट्रिक टन से भी कम सेब की उपज हुई है।
कृषि उपज विपणन बोर्ड के सचिव प्रकाश कश्यप बताते हैं कि घाटी से अब तक 72 लाख सेब की पेटियाें को बाहरी राज्यों की मंडियों को भेजा गया है। उद्यान विभाग के विषय विशेषज्ञ टेक चंद ठाकुर की मानें तो उत्पादन लक्ष्य सिमटने की एक वजह बागवानों द्वारा कच्चे माल का तुड़ान करना भी है। सेब उस दौरान अपने पूर्ण आकार में नहीं था। बागवानाें ने उद्यान विभाग से प्रश्न किया है कि आखिर किस आधार पर विभाग उत्पादन लक्ष्य के आंकड़े को प्रस्तुत करता है। बागवानों का कहना है कि विभाग की वजह से उनके सेब की कीमत 20 रुपये प्रति किलो से ऊपर नहीं उठ पाई।

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