बसपा सम्मेलन में चले लाठी डंडे

दिल्ली विधानसभा गोकलपुरी से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायक का टिकट काटने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी व राम अचल राजभर की मौजूदगी में बुलाए गए कार्यकर्ता सम्मलेन में विधायक समर्थकों ने जमकर हंगामा किया।

इस दौरान हाथापाई हुई और लाठी-डंडे भी चले। नौबत यहां तक पहुंच गई कि वरिष्ठ नेताओं को आयोजन स्थल के पिछले दरवाजे से निकलना पड़ा।

विधायक समर्थकों ने तीन करोड़ रुपये में टिकट बेचने का अरोप लगाया है। वहीं, प्रदेश प्रभारी एमएल तोमर ने नीतियों का उल्लंघन करने पर विधायक को पार्टी से निकालने की बात कही।

दरअसल, बसपा ने गोकलपुरी से विधायक सुरेंद्र कुमार का टिकट काट दिया।

इनकी जगह गोकलपुरी वार्ड से पार्षद चौधरी बलराज को प्रत्याशी बनाया है। इसी संबंध में बसपा ने शुक्रवार को पूर्वी दिल्ली के हरनाम पैलेस में कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी। इसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, एमएल तोमर को भी शामिल होना था।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बैठक शुरू होते ही हाथ में काले झंडे लेकर विधायक समर्थक आयोजन स्थल पर पहुंचे। पार्टी के सुरक्षा दस्ते ने इन्हें मुख्य गेट पर रोक लिया।

इस पर इन लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच बलराज के समर्थक बाहर आए और दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। थोड़ी देर बाद यहां हाथापाई शुरू होने के साथ लाठी-डंडे चलने लगे।

इसकी सूचना मिलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पिछले दरवाजे से बाहर निकाला गया। जबकि मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया।

विधायक समर्थक व बसपा महासचिव हेमसिंह ने आरोप लगाया कि बड़े नेताओं के सामने हम विरोध कर रहे थे। लेकिन बलराज समर्थक गालीगलौज व हाथापाई करने लगे।

इससे न सिर्फ कार्यकर्ता सम्मलेन में बाधा आई, बल्कि आधा दर्जन लोग चोटिल भी हो गए। शनिवार को विधायक के कार्यालय पर कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई है।

वहीं, प्रभारी एमएल तोमर का कहना है कि विधायक ने पार्टी की नीतियों का उल्लंघन किया है। बसपा सुप्रीमो फिलहाल दिल्ली में नहीं हैं।

उनके वापस लौटने के बाद सुरेंद्र कुमार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा।

बसपा में शामिल सुरेंद्र महरौली से लड़ेंगे
कांग्रेस से सालों से जुड़े सुरेंद्र पवार ने बसपा की सदस्यता ले ली है। पार्टी ने इन्हें महरौली से प्रत्याशी बनाया है।

इसकी वजह बताते हुए सुरेंद्र ने कहा कि वह करीब 35 सालों से कांग्रेस की सेवा कर रहे थे। लेकिन महरौली से कांग्रेस विधायक योगानंद शास्त्री के आगे उनका पार्टी में कोई भविष्य नहीं है।

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