
बद्दी (सोलन)। नशे के सौदगारों को प्रतिबंधित दवाओं की खेप फार्मा हब बद्दी से पहुंच रही है। ऐसे में कई नामी कंपनियां संदेह के घेरे में हैं। रविवार देर रात पंचकूला में 176 किलोग्राम प्रतिबंधित दवा स्योएफेड्रीन टैबलेट की खेप के तार बद्दी से जुड़े होने का अंदेशा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार बद्दी में कुछ फार्मा कंपनियां इस दवा का निर्माण कर रही हैं।
क्राइम ब्रांच ने भी संबंधित संचालकों के घरों में दबिश दी है। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक इस ड्रग माफिया का बद्दी में स्थित कुछ उद्योगों के साथ पार्टनरशिप भी हो सकती है। मामले में पकड़े गए छह आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह खुलासा किया है। जिसके बाद फार्मा हब में हड़कंप मचा हुआ है। अंदेशा है कि ड्रग माफिया इस दवाई को यहां से सस्ते भाव में खरीद कर दूसरे राज्यों में चार गुणा अधिक कीमतों से भेजते हैं। चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच के डीएसपी सतवीर सिंह ने बताया कि आरोपियों ने बद्दी के कनेक्शन की बात कुबूली है। मिजोरम के रास्ते प्रतिबंधित दवा की खेप यूरोपियन देशों तक पहुंचनी थी।
हेरोइन बनाने के काम आती है दवा
ड्रग कंट्रोलर नवनीत मारवाह ने कहा कि यह दवा हेरोइन बनाने के काम में आती है। प्रतिबंधित दवा के रा मेटिरियल की खरीद के लिए परमिशन जरूरी है। बद्दी में करीब डेढ़ दर्जन उद्योग इसे बनाते हैं। अभी तक पुलिस ने संपर्क नहीं किया है।
एक्साइज में दर्शाते हैं स्टाक : सिंगला
हिमाचल ड्रग मेनुफेक्चर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव एसएल सिंगला ने बताया कि बद्दी में भी कुछ कंपनियां इस दवाई को तैयार करती हैं। इसका स्टाक भी एक्साइज विभाग को दर्शाना पड़ता है। विभाग की अप्रुवल के बगैर इसकी सप्लाई नहीं की जा सकती है।
