फीस मामले ने उलझन में डाले अभिभावक

फीस मामले ने उलझन में डाले अभिभावक

शिमला
निजी स्कूलों के फीस मामले ने अभिभावकों को उलझन में डाल दिया है। शिक्षा मंत्री के बयान और कैबिनेट के फैसले को लेकर अभी तक लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं। अधिक फीस वसूली की जांच को सरकार ने उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटियां बनाने का फैसला लिया है।

मंत्री ने निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस ही लेने के मौखिक निर्देश दिए हैं। यह दोनों फैसले अभी तक बयानों तक ही सीमित हैं। इसका लाभ उठाते हुए कई निजी स्कूलों का अभिभावकों पर लॉकडाउन के दौरान की पूरी फीस भी चुकाने को लेकर दबाव बनाने का अभियान जारी है। अभिभावकों को उच्च शिक्षा निदेशक की हिदायत के बाद भी पूरी फीस चुकाने के लिए चेतावनी भरे एसएमएस भेजे जा रहे हैं। 

निजी स्कूलों में अधिक फीस वसूली की शिकायतों पर उपायुक्त अभी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले को लेकर शिक्षा विभाग ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। शिक्षा विभाग की ओर से उपायुक्तों को लिखित में सरकार की मंशा से अवगत कराया जाएगा, उसके बाद ही कोई कार्रवाई हो सकेगी। फिलहाल, अफसरशाही की लेटलतीफी का खामियाजा प्रदेश के लाखों अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
सोमवार को फिर शिक्षा निदेशालय घेरेंगे अभिभावक
उच्च शिक्षा निदेशालय का 28 दिसंबर को छात्र-अभिभावक मंच दोबारा घेराव करेगा। सरकार पर निजी स्कूलों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाने और सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली के लिखित आदेश जारी नहीं होने से नाराज अभिभावक इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करेंगे।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि फीस मामले को लेकर सरकार की ओर से अभी तक लिए गए सभी फैसले अभिभावकों को गुमराह करने वाले हैं। मामले को उलझाने के लिए मौखिक बयान देकर अभिभावकों को भ्रमित किया जा रहा है। सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज किया जाएगा।

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