
बंजार (कुल्लू)। क्षेत्र की खस्ताहाल सड़कों के चलते पर्यटन और नकदी फसलों का कारोबार संकट में है। हर साल सैकड़ों पर्यटक बंजार घाटी का दीदार करने पहुंचते हैं। लेकिन सड़कों की खस्ता हालत के चलते वे दोबारा यहां न आने की बात कहकर जाते हैं। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि समय रहते अगर सड़कों की दशा नहीं सुधारी गई तो आने वाले दिनों में पर्यटन कारोबार चौपट हो जाएगा।
हैरत इस बात की है कि लोकसभा उपचुनाव के प्रचार को पहुंच रहे दोनों दलों के नेता भी खस्ता हालत सड़कों पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। 20 किलोमीटर लंबी खुंदन-बठाहड़ सड़क की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है। यह सड़क इलाके की 10 पंचायतों के हजारों लोगों की जीवन रेखा है। इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक शाईरोपा, देहुरी, नागणी, गुशैणी, तुंग और बठाहड़ घाटी के रमणीय स्थलों को निहारने पहुंच रहे हैं। लेकिन खस्ताहाल सड़कें उन्हें फिर से घाटी न आने की हिदायत देती नजर आ रही हैं।
पर्यटन कारोबारी राजीव भारती, खेम भारती, संदीप, बलदेव शर्मा, मोहर सिंह, हेमराज, गोपी तथा राजेंद्र चौहान ने कहा कि पर्यटक बड़ी संख्या में घाटी का रुख कर रहे हैं। तीर्थन घाटी ट्राउट मछली के उत्पादन को लेकर विश्वभर में मशहूर है तथा दुर्लभ पशु पक्षियों और जड़ी-बूटियों के विख्यात नेशनल पार्क भी यहीं है। इस पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिलना भी प्रस्तावित है लेकिन सड़कों की हालत न सुधारी गई तो यहां पर्यटन कारोबार चौपट हो जाएगा। क्षेत्र में सेब, नाशपाती, पलम, लहसुन, मटर तथा सब्जियों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। इन्हीं सड़कों के माध्यम से नकदी फसलों को मार्केट तक पहुंचाया जाता है। लेकिन सड़कों की खस्ता हालत के चलते किसानों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है।
