
हल्द्वानी। देश को आजाद हुए 66 साल हो गए। आज भी लोग खुद को गुलाम मानते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले फिरंगियों ने देश को खोखला किया और अब भ्रष्ट राजनेता और नौकरशाह दीमक की तरह खा रहे हैं। यूं तो हर शख्स की नजर में आजादी के मायने अलग-अलग हैं। मगर ज्यादातर की नजर में आजादी अब भी अधूरी है। देशवासियों ने आजाद हिंदुस्तान का जो सपना संजोया था, वह कभी न पूरा होने वाले सपने की तरह सिमटकर रह गया है। आमजन अभी भी परेशान है। अलग राज्य बनने के बाद लगा था कि हमारे राज्य की अलग पहचान बनेगी लेकिन भ्रष्टाचार रूपी दानव ने यहां भी पूरी तरह पैर फैला लिए हैं। जिसे जहां मौका मिल रहा है वहीं अपने राज्य को खोखला करने में जुटा है।
इनका यह है कहना
– वरिष्ठ सर्जन डा. प्रशांत निगम कहते हैं कि आजादी तो मिली, लेकिन चंद लोगों को। आम आदमी देश में आज भी गुलाम है। यहां आजाद है तो सिर्फ नेता, माफिया, अपराधी और भ्रष्टाचारी। बताते हैं कि उत्तराखंड राज्य का गठन होने के बाद यहां विकास तो हुआ, लेकिन चंद लोगों का। आम नागरिक आज भी विकास की राह देख रहा है।
– बर्तन कारोबारी राजीव अग्रवाल कहते हैं कि आजादी सिर्फ अंग्रेजों से मिली। आम आदमी आज भी गुलाम की तरह जीवन जीने को मजबूर है। शासन-प्रशासन में हर जगह लूट खसोट की होड़ मची है। अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब रोटी को मोहताज है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने से पहले उम्मीद थी कि राज्य बनने पर यहां शायद कुछ सुधार हो। लेकिन सब सपने अधूरे रह गए। हालात जस के तस है। उन्होंने उत्तराखंड की दशा और दिशा दोनों को बदलने की जरूरत बताई।
– प्राइमरी की शिक्षिका भावना जोशी बताती हैं कि आज हर इंसान को विचार व्यक्त करने की आजादी है। पहले तो अंग्रेज अपनी बात रखने पर ही जेल में डाल दिया करते थे। आज अन्याय होने पर आमजन शासन-प्रशासन में गुहार लगा सकता है। वहां सुनवाई न हो तो न्यायपालिका का दरवाजा खटखटा सकते हैं। कहती हैं कि यूपी के अलग होकर उत्तराखंड बनने के बाद यहां के लोगों को काफी फायदा हुआ। रोजगार के अवसर बढे़। पहले यूपी लेवल पर सरकारी सेवाओं में नौकरी पाना बेहद कठिन था। लेकिन राज्य बनने से यहां के लोगों को सरकारी नौकरियों में जाने का भरपूर मौका मिला। उन्होंने भ्रष्टाचार को देश के विकास में बाध्यता का अहम कारण बताया।
– बीएससी की छात्रा अंजलि त्रिपाठी आजादी को अधूरी मानती हैं। कहती हैं कि आजादी का मतलब है कि हर इंसान को कभी भी कहीं भी आने-जाने की आजादी। देश को आजाद हुए 66 साल हो गए। मगर आज भी महिलाएं घर से बाहर निकलने में घबराती है। हर तरफ अपराधियों का बोलबाला है। महिलाएं कहीं सुरक्षित नहीं। बताती है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद विकास की जो उम्मीद थी। वह सिर्फ सपना बनकर रह गई।
– गृहिणी कमलेश बगड़वाल बताती हैं कि देश को आजाद कराने के लिए जिन वीर महापुरुषों ने प्राणों की आहुति दी। अगर वे आज देश के हालात देखते तो शर्मसार हो जाते। जिस आजाद हिंदुस्तान का सपना संजोकर उन्होंने हंसते-हंसते कुर्बानी दे दी, वह सिर्फ सपना बनकर रह गया। कहती हैं कि उत्तराखंड को राज्य का दर्जा मिलने के बाद यहां विकास का जो सपना लोगों ने देखा था। वह भी शायद ही पूरा हो सके।
