प्लेसमेंट जरूरी तो अपनाएं रोस्टर

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ ने विभाग प्रमुखों को पदोन्नति के स्थान पर प्लेसमेंट का फंडा न अपनाने की सलाह दी। विभागों में प्लेसमेंट करना अति आवश्यक है तो उसमें रोस्टर का पालन किया जाए। रोस्टर की अनदेखी करने पर संघ की ओर से न्यायालय में विभाग प्रमुख के खिलाफ अवमानना का केस दायर किया जाएगा। रविवार को हमीरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी।
संघ के प्रदेश महासचिव ज्ञान चंद भाटिया ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पश्चात संघ को पूरा भरोसा है कि प्रदेश सरकार 85वें संविधान संशोधन को लागू करने का निर्णय तीन माह की अवधि से पहले ले लेगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह से आग्रह किया कि संविधान संशोधन को लागू करने की अधिसूचना जारी कर वर्ग को न्याय दिलवाएं। भाटिया ने बताया कि सितंबर 2007 में वीरभद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर संशोधन को लागू किया था, लेकिन कुछ लोगों ने ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय में अधिसूचना को चुनौती दी। भाजपा सरकार उच्च न्यायालय में तय समय में कर्मचारियों से संबंधित डाटा उपलब्ध नहीं करवा पाई, जिस कारण अधिसूचना को रद कर दिया गया। संघ ने मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। माननीय न्यायालय के समक्ष सारे तथ्य रखे गए, जिस आधार पर माननीय न्यायालय ने प्रदेश सरकार को तीन माह में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं तथा पदोन्नतियों पर रोक को भी जारी रखा है।
उनके साथ प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रीतम कौशल, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष रेणू कौशल, प्रेस सचिव दिनेश सहगल, कानूनी सलाहकार एडवोकेट केसी भाटिया, कार्यालय सचिव कुलबीर नरोता, जिला हमीरपुर के अध्यक्ष ई वधेश चंद, जिला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष युद्धवीर सिंह, महिला विंग की जिला अध्यक्ष वीना भाटिया, बड़सर ब्लाक के अध्यक्ष जगदीश, सुजानपुर ब्लाक अध्यक्ष सुरेंद्र उपस्थित थे।

Related posts