
हमीरपुर। एक स्कूल प्रिंसिपल द्वारा राजनीतिक आधार पर विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी उजागर होने के पश्चात बवाल मच गया है। प्रिंसिपल की लिस्ट में शामिल लोगों ने कोर्ट में घसीटने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही शिक्षक संगठनों ने भी प्रिंसिपल की हरकत की कड़ी निंदा की। संघों का कहना है कि प्रिंसिपल को विभाग द्वारा प्रदत्त कार्य को निभाने की ओर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक पचड़ों में फंसना चाहिए। प्रिंसिपल को छात्र हित में चिंतन करना चाहिए, न कि राजनीति क्षेत्र का।
मुख्याध्यापक संवर्ग अधिकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रकाश चंद ठाकुर का कहना है कि शिक्षक संगठनों का कार्य अध्यापक सदस्यों के हितों का संरक्षण, समस्याओं का समाधान करना होता है। न कि राजनीतिक रूप से कार्य करना। किसी व्यक्ति को यदि राजनीति करने का शौक है तो उसे पद से त्याग पत्र देकर राजनीतिक दल में शामिल हो जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मनोज पाल सिंह परिहार का कहना है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को छात्र हित की ओर ध्यान देना चाहिए तथा ऐसे किसी भी क्रियाकलाप से दूर रहना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि शिक्षक संघ, एवं उसके पदाधिकारियों को विभाग, सरकार, छात्रों के बीच कड़ी का कार्य करना चाहिए तथा अपनी मर्यादा में रहते हुए कार्यों का अंजाम देना चाहिए।
हिप्र राजकीय कला अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राकेश कानूनगो का कहना है कि प्रिंसिपल की ओर से मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिख स्थानांतरण का आग्रह करना निंदनीय है। प्रदेश सरकार के पास कार्य को अंजाम देने के लिए सीआईडी विभाग उपलब्ध है, यह कार्य भी उसी को शोभा देता है। विभाग ने प्रशासनिक पद दिया है तो पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए छात्र, विभाग हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रिंसिपल द्वारा सौंपी गई सूची पर कार्रवाई करने से पूर्व कंडक्ट रुल्स की अवहेलना पर प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
