
कुल्लू। ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में रामकथा के आठवें दिन संत मोरारी बापू ने रामचरित मानस के राम विवाह के प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिस समय राम सीता को ब्याह कर अयोध्या लेकर आ रहे थे तो यह क्षण राजा जनक के लिए बहुत ही पीड़ा जनक था। बडे़-बडे़ महापुरुषों को भी बेटी को विदा करते समय मोह हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के पास अपनी विचारधारा हो उसे जीवन में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हो जाती है। संत मोरारी बापू ने कहा कि हमें नित दिन प्रभु से यह दुआ करनी चाहिए कि हे प्रभु संसार के सभी सुख संपदा तेरी ही दी हुई है। हमें भी तेरी दया से सुख प्राप्त हुआ है। हम तो आपका प्रतिदिन स्मरण करते हैं। अगर अवसर मिले तो हमें दर्शन दे देना। उन्होंने कहा कि साधु बहती वायु और पानी के समान होता है। इसलिए उससे जीवन जीने की कला सीख ली जाए, तो हम एक बेहतर जीवन जी सकते हैं। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान कृष्ण कहते हैं कि इस संसार में सुख कहीं पर भी नहीं है। यदि कहीं पर सुख है तो वह मात्र क्षण भर का सुख है। इसलिए जीवन का रस अगर प्राप्त करना चाहते हो तो हरि के नाम का जप करने से जीवन में रस आएगा। उन्होंने कहा कि जीवन में सभी कार्य करो लेकिन अगर सबकुछ करने के बाद भी अगर आपके पास कुछ शेष नहीं बचा है तो हरि नाम का सुमिरन जरूर करें। हरि नाम के सुमिरन से ही जीवन सफल हो जाएगा। साधु भी आम आदमी की तरह जीवन व्यतीत करता है लेकिन वह अपना ध्यान भजन में लगाता है।
