पूर्व तहसीलदार सहित दो को कठोर कारावास

ऊना। विशेष न्यायाधीश रतन सिंह ठाकुर की अदालत ने निष्कांत संपत्ति को बेचने और उसे किसी के नाम दर्ज करने के आरोप में एक पूर्व तहसीलदार सहित जमीन खरीदने वाले को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास और जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जबकि मामले के एक अन्य आरोपी की केस के दौरान ही मौत हो चुकी है।
जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 8 जुलाई 1994 को निष्कांत संपत्तियाें की बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद निष्कांत संपत्ति विभाग के शिमला स्थित एक अधिकारी ने अंब के अठवां निवासी मदन लाल पुत्र सीता राम को भंजाल स्थित निष्कांत संपत्ति के झूठे बिक्री पत्र 20 अक्तूबर 1999 और 21 नवंबर 2003 को जारी कर दिए। इनमें 1-32 हेक्टेयर भूमि की बिक्री 3.11 लाख रुपये में दर्शा दी। वहीं मदन लाल ने उक्त पत्र अंब के तत्कालीन तहसीलदार संतोष कुमार पुत्र दुर्गा दास निवासी दरबली जिला हमीरपुर को दे दिया। तहसीलदार संतोष कुमार ने 27 मार्च 2004 को उक्त जमीन का इंतकाल मदन लाल के नाम दर्ज कर दिया। जबकि निष्कांत संपत्तियों की बिक्री और हस्तांतरण पर पाबंदी के बारे में वर्ष 1994 में ही प्रदेश सरकार ने तहसीलदार स्तर के अधिकारियाें को पत्र लिखकर सूचित कर दिया था।
मामला सामने आने पर भंजाल ग्राम पंचायत ने 27 अक्तूबर 2004 को प्रस्ताव पारित कर विजिलेंस से जांच करवाने की मांग की। विजिलेंस ने भी छानबीन करने के बाद 9 जून 2006 को इस संदर्भ में एफआईआर दर्ज कर न्यायालय में चालान दायर कर दिया। जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि विशेष न्यायाधीश रतन सिंह ठाकुर ने संतोष कुमार को दोषी करार देते हुए धारा 420 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर उन्हें 6 माह का साधारण कारावास, धारा 120 बी के तहत 3 माह कठोर कारावास, 1 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर 15 दिनों का साधारण कारावास और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 13 (2) के तहत 1 वर्ष कठोर कारावास, 10 हजार रुपए जुर्माना और जुर्माना न देने पर 1 माह साधारण कारावास भुगतने की सजा सुनाई। दूसरे दोषी मदन लाल निवासी अठवां अंब को धारा 420 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास, 20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर उन्हें 6 माह साधारण कारावास और धारा 120 बी के तहत 3 माह कठोर कारावास, 10 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक महीन का का साधारण कारावास भुगतने की सजा सुनाई।

क्या है निष्कांत संपत्ति
विभाजन के दौरान भारत से पाकिस्तान पलायन करने वाले लोगों की भारत स्थित संपत्तियों को निष्कांत संपत्तियां घोषित किया गया था। इनका रखरखाव और नियंत्रण करने का कार्य सरकारें ही करती रही हैं।

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