पीड़िता व गवाहों के मुकरने पर दोनों आरोपी एक्सियन बरी

पंचकूला: महिला को मोरनी ले जाकर उससे पंजाब में कार्यरत 2 एक्सियनों द्वारा रेप करने के मामले में पीड़िता व अन्य 8 गवाहों के बयानों से मुकरने व अदालत में पेश होने पर अदालत ने दोनों एक्सियनों जसविंद्र सिंह व जसबीर सिंह को रेप के आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही अदालत को गुमराह कर हल्फिया बयान दाखिल करते हुए गलत शिकायत व बयान देने वाली रेप पीड़िता पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पीड़िता को 7 साल की सजा भी हो सकती है।

28 मार्च 2012 को हुआ था मामला दर्ज

पंचकूला सैक्टर-15 निवासी इस महिला ने पुलिस को शिकायत दी थी कि पंजाब के 2 अज्ञात व्यक्ति उसे नौकरी दिलाने का बहाना बनाकर गाड़ी में मोरनी ले गए और वहां होटल के कमरे में उसके साथ दोनों ने रेप किया और उसे सैक्टर-15 में छोड़कर वापिस जाने लगे तो उसने शोर मचाया और दोनों को पति व अन्य रिश्तेदारों की मदद से पुलिस को पकड़वा दिया था।

पीड़िता ने पुलिस पर भी आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों को शिकायत दी थी कि पुलिस ने उन्हें 25 मार्च को पकड़ लिया था और पैसे लेकर छोड़ दिया था। परंतु पुलिस का कहना था कि पीड़िता ने खुद ही 25 मार्च की बजाए 28 मार्च 2012 को मामले संबंधी शिकायत दी थी और 28 को ही पुलिस ने 2 अज्ञात लोगों के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार बाद में कॉल डिटेल से दोनों की पहचान पंजाब के बी.एंड आर. विभाग में पटियाला व लुधियाना में कार्यरत 2 एक्सियनों जसविंद्र सिंह व जसबीर सिंह के रूप में की थी।

पीड़िता सहित 8 गवाहों के मुकरने से दोनों बरी

बचाव पक्ष के एडवोकेट एस.पी.एस. परमार ने बताया कि दोनों एक्सियनों पर करीब 15 माह चले कोर्ट ट्रायल्ज में पीड़िता ने पहले मैजिस्टे्रट के समक्ष उससे रेप होने के बयान दिए और बाद में इस दौरान ही 2 बार बयानों से मुकरी और अदालत से कहा कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ और न ही वह इन आरोपियों को पहचानती है।

वहीं मामले में पीड़िता के पति, अफसर, एक अन्य गवाह फिरोज, गवाह बब्बन जैदी एवं पीड़िता के अन्य 5 रिश्तेदार भी बयानों से मुकर गए और बीच में एक-दो अदालत के समक्ष पेश ही नहीं हुए। जिसके चलते बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज राजेश गर्ग ने दोनों एक्सियनों जसविंद्र एवं जसबीर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

अदालत को गुमराह करने पर होगी पीड़िता के खिलाफ 193 की कार्रवाई

एडवोकेट परमार ने बताया कि अदालत द्वारा रेप जैसे संगीन आरोप लगाने वाली पीड़िता के अदालत में दिए झूठे बयानों को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता के खिलाफ ही धारा 193 की कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है।

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