
ऊना। बैलेंस शीट पर कारोबार शून्य दर्शाने वाली पांच कोआपरेटिव सोसाइटियों को निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इन दिनों प्रदेश के सभी जिलों समेत ऊना जिले में भी कोआपरेटिव सोसाइटियों की स्थिति का मूल्यांकन करने के साथ 2012-13 का पूरा डाटा एकत्रित किया जा रहा है। इन्हें विभाग ने 15 जून तक का समय दिया है। जिले में एग्रीकल्चर, फिशरी, मिल्क और हाउसिंग समेत विभिन्न प्रकार की 374 कोआपरेटिव सोसाइटियां कार्य कर रही हैं। इनमें एग्रीकल्चर की 218, फिशरी की चार और दुग्ध कारोबार से जुड़ी 25 सोसाइटियां शामिल हैं। पूरा डाटा एकत्रित होने के बाद सोसाइटियों की प्रगति का पता चल सकेगा तथा कई और सोसाइटियों को भी निष्क्रिय घोषित किया जा सकता है। निष्क्रिय घोषित सोसाइटियों को विभाग एक साल का मौका देता है। फिर भी बैलेंस शीट में सुधार नहीं हुआ तो इन सोसाइटियों को खत्म किया जा सकता है। सहकारिता विभाग के डीआई बालक राम शर्मा ने बताया कि डाटा एकत्रीकरण का कार्य जारी है। इसके बाद सोसाइटियों को श्रेणीबद्ध किया जाएगा। तीन करोड़ से ऊपर का कारोबार करने वाली सोसाइटी एए, डेढ़ से दो करोड़ का कारोबार करने वाली सोसाइटी ए श्रेणी में आएगी। इसी तरह बी, सी और डी श्रेणी भी हैं। 30 से 40 लाख रुपए तक कारोबार करने वाली सोसाइटी डी श्रेणी में रहेगी। जिनका कारोबार शून्य होगा, उन्हें निष्क्रिय घोषित किया जाएगा।
उधर, सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार रोशन लाल खजूरिया ने कहा कि एकत्रित किया गया डाटा सोसाइटियों की वित्तीय स्थिति को दर्शाएगा। सोसाइटी पर ऋण आदि की स्थिति का भी पता चल सकेगा। ऊना में चार-पांच सोसाइटियां निष्क्रिय चल रही हैं। इन्हें एक साल का मौका दिए जाने का प्रावधान है।
गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी : रजिस्ट्रार
सोसाइटी को जिंदा दिखाने के लिए कई बार फर्जी तरीके से बैलेंस शीट तैयार की जाती है। इस तरह की गतिविधियों पर विभाग पैनी नजर रखे हुए है। सहायक रजिस्ट्रार ने कहा कि किसी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
