
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी नापाक हरकतों से चीन अभी भी बाज नहीं आ रहा है। एलएसी का कई बार उल्लंघन कर भारतीय क्षेत्र में घुस आने वाले चीनी सैनिकों ने इस बार दुस्साहस की हद ही पार कर दी।
इस महीने की शुरुआत में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान चुनार इलाके में एलएसी पार कर कई किमी अंदर तक घुस आए और यहां से पांच भारतीयों का उठा ले गए।
भारतीय सेना द्वारा हाटलाइन से हस्तक्षेप करने तथा दोनों देशों के स्थानीय कमांडरों के बीच फ्लैग मीटिंग करने के बाद भारतीयों को आखिरकार 11 दिसंबर को छोड़ा गया। जिस भारतीय क्षेत्र पर ये पांचों ग्रामीण अपने पशुओं के साथ मौजूद थे, चीनी सैनिक उसे अपना भू-भाग बता रहे थे।
चेतावनी के बाद माने चीनी सैनिक
हालांकि सेना मुख्यालय ने इस मसले को दबाने की कोशिश की है। उसका कहना है कि दोनों सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सीमा प्रणाली के तहत यह मसला सौहार्दपूर्ण माहौल में सुलझा लिया गया लेकिन सूत्रों का कहना है कि चीनी सैनिक तभी माने जब भारतीय सेना के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर फ्लैग मीटिंग बुलाई और इसे उच्च स्तर पर उठाने की चेतावनी दी। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने इस मुद्दे पर वार्ता की।
यह घटना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान किए गए सीमा रक्षा सहयोग समझौते के बाद घटी है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को एलएसी पर किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचाना है।
अकसर करते रहते हैं चीनी सैनिक घुसपैठ
हाल ही में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने चेतावनी दी थी कि नए सीमा समझौते का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में इस इलाके में कोई घटना नहीं होगी। लेह से करीब 300 किमी दूर चुनार में अकसर चीनी सैनिक घुसपैठ की हरकत करते रहते हैं।
यहां की भौगोलिक स्थिति चीनी सेना के अनुकूल नहीं है और एलएसी पर यही एक मात्र जगह है जहां उसकी सीधी पहुंच नहीं है। इससे पहले खबर आई थी कि चीनी सैनिक सेना के पोर्टर को उठाकर ले गए थे लेकिन सेना मुख्यालय ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि वे सभी आम नागरिक थे।
