
कुल्लूू। क्या आपने कभी ऐसी शादी देखी है जिसमें बैंड बाजा या शहनाई न हो। दूल्हा बिना सेहरे के आए और दुल्हन को ब्याह कर ले जाए। मदिरापान बिलकुल भी न हो, भले ही आपके सगे संबंधी नाराज होकर शादी छोड़कर वापस घर ही क्यों न लौट जाए। धार्मिक नगरी मणिकर्ण घाटी इसी के लिए जानी जाती है। यहां के लोग सदियों से देव नियमों में बंधे हुए हैं। वे आज भी देवताओं के आदेश मानते हैं चाहे वे कितने भी कड़े हो। घाटी में 20 दिन के अंतराल में 40 से अधिक शादियां हुईं, लेकिन पांच परिवार ऐसे भी थे जिन्होंने अपने बेटे की शादी में न बैंड-बाजा किया और न ही कोई शहनाई बजाई।
मणिकर्ण घाटी के कुछ गांवों में 22 नवंबर से 12 दिसंबर तक 40 से अधिक शादियों हुईं। इनमें से पांच शादियां ऐसी हुई कि जहां बैंड-बाजे बिना ही बारातें आईं व गई। दूल्हे भी बिना सेहरे के आए। किसी-किसी शादी में तो गणेश पूजा, पीपल की पूजा भी नहीं हुई जो शास्त्र अनुसार जरूरी है। लेकिन यहां विवाह शादियों में आराध्य तथा कुल्ज देवी-देवताओं की ही पूजा की गई। अचंभित करने वाली बात तो यह हुई कि इन विवाह-शादियों में मदिरापान का भी सेवन नहीं हुआ। बारातियों ने फिर भी नाच-गाने का आनंद लिया। यहां ये भी देखने को मिला कि दूर-दराज से आए रिश्तेदाराें ने मिलनसार तो किया, मगर शराब नहीं मिलने पर नाराज होकर आधा शादी समारोह छोड़ घर लौट गए। गांव के लोग तो खुशी की बेला पर बैंड बाजा भी बजाना चाहते हैं, मगर इन गांवों में देवी-देवताओं की आज्ञा नहीं है। देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना बाजे-गाजे के साथ होती है, लेकिन विवाह-शादी, मुंडन आदि समारोह के दिन बैंड बाजा नहीं बजाया जाता है। इसके लिए देवी-देवताओं के कड़े निर्देश होते हैं। जानकारी के अनुसार अगर गांवों में शादी बिना शोर-शराबे के हो तो इसे बरकत मानते हैं। मणिकर्ण घाटी के पुरोहित जगदीश शर्मा ने बताया कि एक दर्जन के करीब विवाह-शादियां उनके हाथों संपन्न हुई, लेकिन तीन शादियों में बिलकुल भी बैंडबाजे तथा शराब आदि का प्रयोग नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि गांव में सिर्फ देव कानून ही चलता है, जो इसकी पालना करता है वह जिंदगी में अच्छे कार्यों की ओर बढ़ता है। अगर देव नियमों की धज्जियां उड़ी तो उसे कड़ी सजा भी मिलती है। माता कैलाशना के गुर बेली राम ने बताया कि मणिकर्ण घाटी के डढेई, निचली डढेई, ऊपली डढेई, हुरण, धारला, शराणीबेहड़ के कुछ घरों में इस पर पूर्र्ण प्रतिबंध है। उन्होंने बताया कि इस बार पांच शादियां बिना बैंड बाजे के ही हुईं।
